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नेहरू ने ऐसा क्यूँ कहा “I AM HINDU BY AN ACCIDENT”

नेहरू खानदान यानी गयासुद्दीन गाजी का वंश 

  • भारत मे और कोई नेहरू क्यूँ नहीं हुआ ?

  • नेहरू ने ऐसा क्यूँ कहा “I AM HINDU BY AN ACCIDENT”

  • कभी फ़िरोज़ H/o इंदिरा गाँधी उर्फ़ मेमुना बेगम का जन्म या मृत्यु दिवस मनाते नहीं देखा है, क्यों?

1. गंगाधर नेहरु

इस देश मे पैसठ सालो से कांग्रेस  का राज रहा .. फिर भी ये नेहरु का कश्मीर का घर क्यों नही खोज पाए ? खोज तो लिए फिर उसे जाहिर क्यों नही किया ? असल मे ये  खानदान मुस्लिम मूल का है
नेहरू से पहले ….नेहरू कीपीढ़ी इस प्रकार है….

1. गंगाधर नेहरु
2. राज कुमार नेहरु
3. विद्याधर नेहरु
4. मोतीलाल नेहरु
5. जवाहर लाल नेहरु
गंगाधर नेहरु (Nehru) उर्फ़ GAYAS -UD – DIN SHAH जिसे GAZI की उपाधि दी गई थी ….
GAZI जिसका मतलब होता है (KAFIR – KILLER) इस गयासुद्दीन गाजी ने ही मुसलमानों को खबर (मुखबिरी ) दी थी की गुरु गोबिंद सिंह जी नांदेड में आये हुए हैं , इसकी मुखबिरी और पक्की खबर के कारण ही सिखों के दशम गुरु गोबिंद सिंह जी के ऊपर हमला बोला गया, जिसमे उन्हें चोट पहुंची और कुछ दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई थी.और आज नांदेड में सिक्खों का बहुत बड़ा तीर्थ-स्थान बना हुआ है.|

जब गयासुद्दीन को हिन्दू और सिक्ख मिलकरचारों और ढूँढने लगे तो उसने अपना नामबदल लिया और गंगाधर राव बन गया, और उसे इससे पहले मुसलमानों ने पुरस्कार के रूप में अलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में इशरत मंजिल नामक महल/हवेली दिया, जिसका नाम आज आनंद भवन है.| आनंद भवन को आज अलाहाबाद में कांग्रेस उर्फ पोर्नग्रेस का मुख्यालय बनाया हुआ है इशरत मंजिल के बगल से एक नहर गुजरा करती थी, जिसके कारण लोग गंगाधर को नहर के पास वाला, नहर किनारे वाला, नहर वाला, neharua,आदि बोलते थे जो बाद में गंगाधर नेहरु अपना लिखने लगा इस प्रकार से एक नया उपनाम अस्तित्व में आया नेहरु और आज समय ऐसा है की एक दिन अरुण नेहरु को छोड़कर कोई नेहरु नहीं बचा …
अपने आप को कश्मीरी पंडितकह कर रह रहा था गंगाधर क्यूंकि अफगानी था और लोग आसानी से विश्वास कर लेतेथे क्यूंकि कश्मीरी पंडितभी ऐसे ही लगते थे.
अपने आप को पंडित साबित करने के लिए सबने नाम के आगे पंडित लगाना शुरू कर दिया
1. गंगाधर नेहरु
2. राज कुमार नेहरु
3. विद्याधर नेहरु
4. मोतीलाल नेहरु
5. जवाहर लाल नेहरु लिखा ..और यही नाम व्यवहार में लाते गए …

  • पंडित जवाहर लाल नेहरु अगर कश्मीर का था तो आज कहाँ गया कश्मीर में वो घर आज तो वो कश्मीरमें कांग्रेस का मुख्यालय होना चाहिए जिस प्रकार आनंदभवन कांग्रेस का मुख्यालय बना हुआ है इलाहाबाद में….

  • आज तो वो घर हर कांग्रेसी के लिए तीर्थ स्थान घोषित हो जाना चाहिए

  • ये कहानी इतनी पुरानी भी नहीं है की इसके तथ्य कश्मीर में मिल न सकें ….आज हर पुरानी चीज़ मिल रही है ….चित्रकूट में भगवन श्री राम के पैरों के निशान मिले,लंका में रावन की लंका मिली, उसके हवाई अड्डे, अशोक वाटिका, संजीवनी बूटी वाले पहाड़ आदि बहुतकुछ….समुद्र में भगवान श्री कृष्ण भगवान् द्वारा बसाईगई द्वारिका नगरी मिली ,करोड़ों वर्ष पूर्व की DINOSAUR के अवशेष मिले तो 150 वर्ष पुरानाकश्मीर में नकली नेहरू काअस्तित्व ढूंढना क्या कठिन है ?????दुश्मन बहुत होशिआर है हमें आजादी के धोखे में रखा हुआ है,

  • इस से उभरने के लिए इनको इन सब से भी बड़ी चुस्की पिलानी पड़ेगी जो की मेरेविचार से धर्मान्धता ही हो सकती है जैसे गणेश को दूध पिलाया था अन्यथा किसी डिक्टटर को आना पड़ेगा या सिविल वार अनिवार्य हो जायेगा

तो क्या सोचा हम नेहरू को कौनसे नाम से पुकारे ? जवाहरुद्दीन या चाचा नेहरू ?
जो नेहरू नेहरू कहते है उनसे पूछिये की इस खानदानके अलावा भारत मे और कोई नेहरू क्यूँ नहीं हुआ ?अगर यह वास्तव मे ब्राह्मण था तो ब्राह्मनों मे नेहरू नाम की गोत्र अवश्य होनी चाहिए थी ? क्यूँ नहीं ?क्यों देश मे और कोई नेहरू नहीं मिलता?क्या ये जवाहर लाल के परिवार वाले आसमान से टपके थे ?

  • जो लोग नेहरू गांधी परिवार को मुस्लिम मानने से इंकार करते है उनके लिए प्रश्न

  • # देश मे सोलंकी, अग्रवाल, माथुर, सिंह, कुशवाहा, शर्मा, चौहान, शिंदे, कुलकर्णी, व्यास, ठाकरे आदि उपनाम हजारो, लाखो करोड़ो कीसंख्या मेमिलेंगे लेकिन “नेहरू” सेकड़ों भी नहीं है क्यूँ?

  • # कश्मीरी हमेशा अपने नाम के पीछे पंडित लगाते है लेकिन जवाहर लाल के नाम के आगे पंडित कैसे ? गंगाधर के पहले का इतिहास क्यूँ नहीं है ?

  • # नेहरू ने ऐसा क्यूँ कहा “I AM HINDU BY AN ACCIDENT”

क्या ये प्रश्न आपके मन मे उठे कभी ? ?? ? इस कोंग्रेसी वामपंथी इस कोंग्रेसी महिमामंडित गांधी नेहरू इतिहास ने कभी मौका ही नहीं दिया ? ? ?ऐसे ही मासूम विद्यार्थियों के भेजे मे यह गांधी नेहरू परिवार

की गंदगी भरी जा रही है देश के लाखो स्कूलो मे…इस गांधी नेहरू नाम के इतिहास के सामने राम कृष्ण, राणा, शिवाजी आदि हजारो महावीरों सपूतो के किस्से इतिहास भी नगण्य किए जाते है…इतिहासकारो और इतिहासिक संस्थानो पर कॉंग्रेस और वामपंथियों का कब्जा है कैसे देश की पीढ़ी वीर बनेगी ? ? ? ?

इस परिवार ने देश के अन्य वीर शहीदो की शहीदी को भू फीका कर दिया अपने महिमामंडित इतिहास से हर पन्ने पर इनका नाम नजर आता है …हमें तो अब चाहिए पूर्ण आजादी …राम कृष्ण राणा शिवाजी के देश मे नकली गाँधी नेहरू नाम के पिशाच नहीं चाहिए
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Feroze Gandhi

* जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गाँधी ने तो अपने बेटा-बेटी के आपस में रिश्ते नहीं किए तब कहाँ से आ धमका नेहरू-गाँधी खानदान और उनके जॉइंट वारिस? जिनका गाँधी जी से कोई वास्ता नहीं है, वे गाँधी के वंशज कैसे बन गये?

* जवाहरलाल नेहरू राहुल-वरुण की दादी के पिता जी थे, यानि तीसरी पीढ़ी में. तब ये नेहरू के वंशज कैसे बन गये?

* क्या नेहरू ने दूर की सोचकर अपने दामाद फ़िरोज़ को गाँधी नाम दिलाकर विधि-विधान के विरुद्ध कार्य किया था?

* पैदा होने के बाद आदमी का धर्म तो बदला जा सकता है, लेकिन जाति बदले का अधिकार तो विधि के हाथ भी नहीं है.

* फ़िरोज़ जहाँगीर घंडी को किन्ही दस्तावेज़ो में पारसी (ज़्रोस्ट्रियन) लिखा गया है. बरहाल वे पारसी थे कि, मुस्लिम इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता लेकिन गाँधी जी के कुछ नहीं थे और न ही वे किसी भी तरह से गाँधी थे. कश्मीरी कौल ब्राहमण की बेटी इंदिरा और फ़िरोज़ की संतान गुजरात के गाँधी बनिये किस विधि से हो सकती है?

* इस देश के पढ़े लिखे लोग ग़लत बात का विरोध क्यों नहीं करते? इस नामकरण से इस देश का बहुत कुछ बर्बाद हो रहा है, और बर्बाद हो चुका है….?

* अगर यह छद्म नामकरण रोक दिया जाता तो आज देश की तस्वीर ही कुछ और होती. चुनाव में नेहरू-गाँधी के वंशज की झोक में ठप्पा मारने वालों का रुख़ ही कुछ और होता और 5-7% वोट का डेवियेशन इस देश की तकदीर बदल देता.

* पढ़े कथित गाँधी-नेहरू के वंशज की असलियत, जिससे लम्बे समय से इस देश का वोटर्स धोखा में हैं:

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एक और तर्क दिया जाता है इस बात के लिए की ,
क्या वजह थी कि जब इंदिरा ने फिरोज़ जहांगीर शाह; पारसी मुसलिमद्ध से ब्याह रचाया तो नहेरु ने उनकी एक नहीं सुनी और गांधीजी ने  फिरोज को गोद लेना पडा़। मेरी समझ में तो पूरे देश की तरह शायद गांधी जी भी यही मानते थे कि आज़ादी की लड़ाई में सबसे ज्यादा योगदान उन्हीं का है और इसलिए वो नहीं चाहते थे कि गांधी नाम की विरासत उनके साथ ही खत्म को जाए, वो चाहते थे कि उनका नाम सियासी गलियारों में हमेशा गूंजता रहे, लेकिन खुद को किसी पद से जोड़ के महानता का चोगा त्यागे बिना। उन्हें ये मौका इंदिरा की शादी से मिला,गांधी जी का एक और गुण भी था उनकी दूरर्दर्शिता, इंदिरा में नेतृत्व के गुण वो पहले ही देख चुके थे,वो जानते थे कि इंदिरा से परमपरागत राजनीती की शुरुआत होगी और इसीलिए उन्होंने फिरोज़ को गोद लिया और उसे अपना नाम दिया।

लोगों का मानना है कि र्सिफ हिन्दु कट्टरपंथी ही नहीं नेहरु जी भी इस शादी के खिलाफ थे,पर नेहरु ने अपनी एक किताब में लिखा है कि फिरोज़ को वो बेहद पसंद करते थे और उन्हें इस शादी से नहीं बल्कि लोंगों के विद्रोह से परेशानी थी,जिसका अंदाजा उन्हें और गांधी जी को पहले से था। देश आज़ादी की कगार पे था और गांधी जी का प्रभाव अपने चरम पे,उन्होंने इंदिरा और फिरोज के पक्ष में एक वक्तव्य जारी किया,जिसे पढ़ के और सुन के सभी शांत हो गये। फिर भी उन्होने फिरोज को अपना नाम दिया, चाहे इंदिरा हो,राजीव हो,सोनिया या अब राहुल,ये तो बस अलग-अलग चेहरें हैं, देश चलाने वाला तो गांधी ही है,पर हम तो उन्हें महात्मा के नाम से जानते हैं!          

“समंदरे शोहरत का साहिल नहीं होता,
 डूबते हैं बड़े बड़े तैराक इस समंदर में!!!  ”  

  • इस देश की कुछ जनता को पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा-फिरोज का जन्म और मृत्यु दिवस मनाते देखा है. राजीव और संजय का भी मृत्यु दिवस कुछ पोलिटिकल/ सरकारी/ जनता द्वारा मनाया जाता है. मज़े की बात देखिए कि कभी फ़िरोज़ H/o इंदिरा गाँधी उर्फ़ मेमुना बेगम का जन्म या मृत्यु दिवस मनाते नहीं देखा है, क्यों?
  • इंदिरा के पति यानी कि राजीव व संजय के पिता का नाम लेवा कोई क्यों नहीं रहा, यानी कि जो हैं वे उनके ये पावन दिन क्यों नहीं मनाते हैं? क्यों नहीं उनकी कब्र पर उनके वंशज अमुक दिन माला या फूल चढ़ाने जाते हैं? क्या फ़िरोज़ का इंदिरा से शादी करके दो बच्चे पैदा करने का ही कांट्रॅक्ट था? ये सब ज्वलंत प्रश्न हैं.
Feroze Gandhi
फिरोज गांधी
Member of the Indian Parliament
for Pratapgarh District (west) cum Rae Bareli District (east)[1]
In office
17 April 1952 – 4 April 1957
Member of the Indian Parliament
for Rae Bareli[2]
In office
5 May 1957 – 8 September 1960
Succeeded by Baij Nath Kureel
Personal details
Born 12 September 1912
Bombay, Bombay Presidency, British India
Died 8 September 1960 (aged 47)
New Delhi, Delhi, India
Resting place Parsi cemetery, Allahabad
Nationality Indian
Political party Indian National Congress
Spouse(s) Indira Gandhi
Children Sanjay Gandhi,
Rajiv Gandhi
Religion Zoroastrianism [विकिपेडीया से उपलब्ध]
  •  अब भी अगर इस लेख पर विश्वास ना आ रहा हो तो इस लिंक को विजिट करे [http://www.vepachedu.org/Nehrudynasty.html]
  • दस्तावेज़ों और नेट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार फ़िरोज़ एक मुस्लिम पिता और घंडी गोत्र की पारसी महिला की संतान थे. देवी इंदिरा और फ़िरोज़ ने प्रेम विवाह किया था. नेहरू अपना वंश चलाने के लिए अपने दो नातियों राजीव और संजय में से एक को गोद ले सकते थे, लेकिन उस दशा में वह शख्स नेहरू कहलाता. अगर नेहरू ने फ़िरोज़ को घर जमाई भी रख लिया होता तो भी उसके बच्चे नेहरू हो गये होते. यानी कि नेहरू ने अपनी इकलौती बेटी इंदिरा का विवाह कर दिया था, लेकिन तत्पश्चात किसी को गोद नहीं लिया था. इस प्रकार जादायद भले ही इंदिरा को मिले लेकिन खानदानी वारिस होने का हक उसे नहीं मिल सकता है. इस प्रकार जवाहरलाल नेहरू का खानदान उनकी मृत्यु के साथ ही ख़त्म हो गया था. इंदिरा-फ़िरोज़ की संतान फ़िरोज़ की वंशज हुई न कि नेहरु की.
  • फ़िरोज़ ख़ान क्यों और कैसे गाँधी बन गये, यह एक रोचक बात है. अगर किसी की माँ उसके बाप को तलाक़ देकर खुद बच्चे की परवरिश करे और उसे अपने परिवार का नाम दे तो भी उस दशा में फ़िरोज़, फ़िरोज़ घंडी हो सकते थे. हम नहीं जानते कि फ़िरोज़ के साथ ऐसा कुछ हुआ था या नहीं?
  • रही समस्त बुराई की जड़ मोहन दस करमचंद गाँधी द्वारा फ़िरोज़ को गोद लेने की बात. यह भी सुना है कि सेकुलर नेहरू फ़िरोज़ से इंदिरा का विवाह करने को तैयार नहीं थे, जबकि वह पहले ही बिना बाप को बताये शादी कर चुकी थी. ऐसी दशा में गाँधी ने कहा था कि वे फ़िरोज़ को गोद लेते हैं. गोद लेना कोई गुड्डे-गुड़िया का खेल नहीं है. गोद लेने की एक प्रक्रिया है, एक एक विधि-विधान है. एक उम्र है. यही नहीं गोद लेने के लिए जाति आधारित क़ानून भी थे. गाँधी जी कोई खुदा नहीं थे कि वे जब जो चाहे कर लेते. तब गाँधी ने अगर यह बात की भी तो यह बड़ी ही हास्यस्पद घटना है, और एक बेरिस्टर से ऐसी मूर्खता पूर्ण बात की कल्पना नहीं की जा सकती है. (इससे साबित होता है की वो बेरिस्टर की डिग्री के नाम पर विदेश किसी और मिशन पर गए थे)
  • दादी के पिता जी का वारिस दादी का पोता हो, शायद यह अजूबा दुनिया में भारत में ही मान्य हो सकता है. अधिकतर लोगों को तो अपनी दादी के पिता जी का भी नाम मालूम न होगा. दादी के पिता जी का वारिस दादी हो सकती है या दादी का पुत्र, भला पोता काहे और कैसे वारिस हो जाएगा? और वह भी बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के.
  • इनके नेहरु के वारिस होने की ही नहीं कुछ सिरफिरे लोग इनके गाँधी के वारिस होने की भी बात करते हैं. वह यह नहीं बताते कि ये लोग कौन से गाँधी के वारिस हैं? इन्हें उस गाँधी का पूरा नाम लेना चाहिए. यह देश तो गाँधी का मतलब मोहनदास कर्मचंद गाँधी मानता है. अगर फ़िरोज़ उर्फ छद्म गाँधी की बात कर रहे हैं तो उसका पूरा नाम क्यों नहीं लेते, कभी उसका जन्म या मृत्यु दिवस क्यों नहीं मनाते? कभी उसकी कब्र पर झाड़पूंछकर फूल पत्ते क्यों नहीं धरते? और अगर महात्मा गाँधी जी के वारिस होने की बात करते हैं तो गाँधी जी का अपना भरा पूरा परिवार है, वे दूसरों को वारिस क्यों बनाते? यह तो ऐसा हुआ जैसे कि खरगोश ऊँट का वारिस होने की ताल ठोक रिया हो.
  • तब प्रश्न उठता है कि फ़िरोज़, फ़िरोज़ गाँधी कैसे हो गये, और उन्हें इस उपनाम जो की गुजरात के बनिए वर्ग में प्रयुक्त होने वाले गाँधी के उपयोग की इजाज़त किसने और क्यों दी? फ़िरोज़ को अपने सही नाम पर क्यों आपत्ति हुई, और क्यों ही उसे नाम बदलने की ज़रूरत पड़ी? देश के बहुत से लोग तो आज भी यह समझते हैं कि यह कथित गाँधी परिवार महात्मा गाँधी से रिलेटेड है, जबकि ऐसा कतई नहीं है. कथित कश्मीरी पंडित की बेटी इंदिरा-फ़िरोज़ से विवाह करके गाँधी बनिया कैसे पैदा कर सकती थी? इस देश के पढ़े लिखे तबके को यह सोचना चाहिए.
  • राहुल के दादा फ़िरोज़ थे, और दादी कथित कश्मीरी पंडित की बेटी थी, और वह भी तीन पीढ़ी पहले. राहुल एक इटलियन लेडी और राजीव वल्द फ़िरोज़ की औलाद है, तब वह नेहरू-गाँधी परिवार का वारिश किस विधि से हो गया, इस देश के प्रबुद्ध जन इस पर विचार करे. यही नहीं कथित रूप से भी राहुल ही नेहरू-गाँधी परिवार का वारिस क्यों हुआ, मेनका-संजय का बेटा वरुण भी वारिस क्यों नहीं हुआ?
  • क्या इस नामकरण की साजिश में गाँधी और नेहरू भी शामिल थे? और अगर ऐसा था तो गाँधी ने इस देश के साथ बहुत बड़ा जघन्य धोखा अपराध किया है. धर्म परिवर्तन हो सकता है लेकिन दुनिया की कोई विधि-विधान जाति परिवर्तन नहीं कर सकता है, यानी कि गाँधी जी फ़िरोज़ को गुजराती बनिया गाँधी में परिवर्तित नहीं कर सकते थे, किसी प्रौढ़ फ़िरोज़ को गोद नहीं ले सकते थे. अपना भरा पूरा परिवार होते हुए भी अपना नाम किसी प्रौढ़ को दे देने का अधिकार गाँधी जी को भी प्रदत्त नहीं था.
[Allahabad Parsi Anjuman trustee Rustom Gandhi has sent an e-mail to Parsiana detailing how his efforts with government departments for improvements to the neglected Allahabad Parsee Cemetery have borne fruit. Feroze Gandhi, husband of the late Prime Minister Indira Gandhi is buried here.]
  • दस्तावेज़ों के अनुसार फ़िरोज़ की कब्र इलाहाबाद के पारसी  कब्रिस्तान में हैं. दूसरों की कब्र/ समाधियों पर माला टांगने वाले लोग क्यों नहीं अपने पूर्वज फ़िरोज़ की कब्र की सुध लेते हैं? शायद इसलिए कि कहीं लोग असलियत न जान जाएँ.
  • जो लोग शासन की समझ रखते हैं वें भी जानते होंगे कि सेना प्रत्यक्ष रूप से ही युद्ध में हार जीत के निर्णय में भागीदार होती है असली जीत का भागीदार तो कोई और ही होता है. एक चार कमरे के मकान में कोई अंजान व्यक्ति फ्रीली नहीं घूम सकता. तब अरब़ अक्रांता/ अँग्रेज़ों ने कैसे इस इतने बड़े मुल्क पर फ़तह कर उसे सैकड़ों वर्ष तक गुलाम बनाए रखा? रावण जैसा विद्याधर, योद्धा क्या यूँ ही राम के हाथों हार गया, और मारा गया. जी नहीं सच यह है कि `घर का भेदी लंका ढ़ावे’ हुआ है. जीत के लिए श्रेय हमेशा सशक्त ख़ुफ़िया तंत्र के सिर होता है. हार के प्रमुख कारणों में से एक कारण, पराजित देश के देशद्रोही/ समाजद्रोही भेदियों की नकारात्मक भूमिका होती है. अगर ये देशद्रोही/ समाजद्रोही भेदिये विजयी सेना के ख़ुफ़िया तंत्र को अपने देश के राज न दें तो स्थिति ही कुछ और होती 
  • आज इस देश में सोनिया क्या अपने बल पर अध्यक्ष बनी बैठी है? क्या उसमें इतना बूता है? तो उत्तर होगा कतई नहीं. यहाँ दो पहलू हैं एक तो यह प्रोपगॅंडा की राहुल नेहरू-गाँधी खानदान का वारिस, जैसे कि वरुण उनमें से किसी का कुछ न लगता हो. दूसरे वे कौंच के बीज इस कुकर्म में दोषी हैं जो इस देश की बर्बादी में विभीषण की भूमिका निभा रहे हैं, और सत्ता और संपत्ति के लालच में डूबे हैं. 
  • उन विभीषणों को यह नहीं भूलना चाहिए कि आज भी विभीषण का नाम समाज में गाली समझा जाता हैं. वे अपने मन से अपने कुकर्मों का हिसाब लगाकर कभी ज़रूर देखे, और की तो छोड़िए उनकी आत्म ही अगर कभी जाग गयी तो उन्हें माफ़ न करेगी. किसी की आत्मा कभी जागे न जागे लेकिन मृत्यु के समय ज़रूर जागेगी, ….और उस समय उन्हें देश के समाज के साथ धोखा करने के पाप का बोध तो हो जाएगा, लेकिन तब प्रायशचित का न तो समय रहेगा, न ही शक्ति.

जननी जनमभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी

सुखस्य मूलं धर्म:
धर्मस्य मूलं अर्थ:
अर्थस्य मूलं वाणिज्य:
वानिजस्य मूलं स्वराज्य:
स्वराज्यस्य मूलं चारित्रं.

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कॉंग्रेस का भावी पीएम 2014 राजकुमार निकला मानसिक बीमार !? Glossophobic? : विकिलिक्स !!

राहुल की असफलता और कमजोर नेतृत्व से पीछड़ने का पर्दाफाश हुआ विकिलिक्स के माध्यम से –
ये साइट भी मेरी तरह बिना सबूत कोई खुलासा नहीं करती
विकिलीक्स के एक खुलासे के मुताबिक कांग्रेस के अंदर के लोग मानते हैं कि राहुल गांधी कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते और प्रियंका गांधी राहुल की तुलना में ज्यादा समझदार हैं।  मार्च 2005 में अमेरिकी राजनयिक रॉबर्ट ओ ब्लैुक की बातचीत राजनीतिक विश्लेषक सईद नकवी से हुई थी। नकवी ने कहा था कि वह राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी के दोस्त थे और गांधी परिवार के शुभचिंतक हैं। नकवी के मुताबिक कांग्रेस के भीतर की खबर रखने वाले और सोनिया गांधी के बेहद करीबी लोग यह मानते हैं कि कई वजहों से राहुल गांधी कभी भी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। नकवी के मुताबिक राहुल गांधी को इमोशनल और साइकॉलजिकल नेचर की ‘ पर्सनैलिटी प्रॉब्लम्स ’ हैं, जिसकी वजह से वह प्रधानमंत्री के रूप में काम नहीं कर पाएंगे।
नकवी के मुताबिक कांग्रेस में उनके परिचितों ने उन्हें बताया कि अमेठीके एमपी के रूप में राहुल असफल रहे। कांग्रेस को उम्मीद थी कि राहुल गांधी यूपी में बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे लेकिन उन्होंने कुछ अच्छा करने की बजाय पार्टी को नुकसान ही पहुंचाया। कांग्रेसके लिए बेहतर होगाकि वह मायावतीकी पार्टी की जूनियर पार्टनर बन जाए
नकवीने यहभी कहा कि गांधी परिवारने हमेशा इस बातको प्राथमिकता दी कि प्रियंका गांधी राजनीतिमें आएं क्योंकि वह ज्यादा समझदार हैं। नकवीका यह भी कहना था कि गांधी परिवार में अब कोई भी ऐसा नहीं बचा जिसकी शख्सियत करिश्माई हो।इंदिरागांधी परिवारकी आखिरी प्रभावशाली नेताथीं और अगर उनकी हत्या नहीं हुई होती तो राजीव गांधी भी दोबारा नहीं चुने जाते
Φ क्या
होती है इमोशनल और सायकोलोजिकल पर्स्नालिटी प्रॉब्लेम्स? Glossophobic
सामाजिक भय सार्वजनिक अपमान या शर्मिंदगी के डर से रोगी पीड़ित रहता है. यह कई मानसिक विकारों के भय, जो सभी अत्यधिक, विशिष्ट, और लगातार और एक वस्तु, गतिविधि या स्थिति के डर द्वारा वर्गीकृत  है. सामाजिक भय के साथ लोगों के सामने खाने या बोलने से बचना चाहते है, इसी  तरहसे सार्वजनिक बाथरूम का उपयोग जैसे जनतामें ऐसे गतिविधियों कर से बचते है. अंत में, सामाजिक भय के साथ किसी को डर है कि लोगों को वे नहीं जानते कि उन्हें जज कर सकते हैं, जो चिंता उसे हर समय रहती है . सबसे अधिक, सामाजिक भय जल्दी किशोरावस्था और 25 साल की उम्र के बीच विकसित होता है । इसके लिए मेडिसिन भी सामाजिक या व्यावसायिक स्थितियों को संभालने के अधिक स्थायी उपचार से पहले कुछ प्रभाव रखती है पर यह कुछ समय ही राहत देती है.
मूजे सहानुभूति है ऐसे रोगियो से इसलिए मैंने ही इस पोस्ट मे इस बारे मे जानकारी और उपचार के लिंक दिये है जो कॉंग्रेस करवा शके!

कुछ और भी आरोपो और तथ्यो की लिंक जो बिकी हुई कभी नहीं उठाती !!

मित्रों राहुल गांधी कितना कामयाब व्यक्ति है यह तो पूरा भारत जानता है. चुनावी नौटंकी, सुकन्यादेवी पर बलात्कार, मुंबई पर आतंकवादी हमलों के बाद पार्टी में शामिल होना, हिंदू विरोधी टिप्पणिया और ना जाने क्या – क्या !! पर फिर भी भारत के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर इस नाम जोर शोर से लिया जाता है. क्या है राहुल गांधी का सच? पढ़िए विस्तार से:

  • 2) खुफ़िया कूटनीतिक दस्तावेज़ जारी करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स के मुताबिक पिछले साल राहुल ने अमेरिकी राजदूत से बातचीत के दौरान कहा था कि भारत को मुस्लिम आतंकवादियों की तुलना में हिन्दू संगठनों से ज़्यादा ख़तरा है।
  • 3) राहुल गांधी इटली के नागरिक होने के कारण भारत के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते:
  • 4) मुंबई में बम धमाके के बाद कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने एक गैरजिम्‍मेदाराना हमला बयान देते हुए भारत की तुलना अफगानिस्तान से की। राहुल गांधी ने आगे कहा कि अफगानिस्तान और इराक में तो ऐसे हमले रोज हुआ करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में भारत सरकार को दोष देना ठीक नहीं होगा।
  • 5) मुंबई पर 26-11-2008 कों हुए आतंकवादी हमले के तुरंत बाद राहुल गांधी पार्टी में शामिल हुए:
  • 6) 2001 में बोस्टन हवाईअड्डे पर स्मगलिंग करते वक्त गिरफ्तार:
  • 7) राहुल गांधी और उनके छह दोस्तों ने 3 दिसंबर 2006 की रात अमेठी के एक गेस्ट हाउस में 24 वर्षीय सुकन्या देवी के साथ बारी बारी से बलात्कार किया था. सुकन्या सहित उसके माता पिता को “गायब” कर दिया गया है.
  • 8) अमेठी में कोई भी विकास कार्य नहीं किया, जनता बेहाल
████ █▌║││█║▌│║█║▌© Official Jugal Eguru™ ║││█ ADD FRIEND – GET BEST: VISIT TIMELINE -..|► सच्चाई-पारदर्शिता-देशप्रेम -विश्वास-क्रांतिकारी मौलिक पोस्ट और निर्भीक खबरे~True Hidden History║││█ हर सच्ची और मीडिया की छुपाई गई न्यूझ और हकीकत जानने के लिए www.facebook.com/jugal24x7 = MUST LIKE to Support Me & Get Best Updates ▬ http://www.facebook.com/weneedtrueindians
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गांधी-कॉंग्रेस का काला इतिहास – भाग 1 / 6

 गांधी-कॉंग्रेस का काला इतिहास – भाग 1 / 6

संशोधन एवं संकलन – जुगल पटेल
100 – राज हंस सोसा। अंदाडा 
अंकलेश्वर – जी – भरूच –
गुजरात -393 010
आज की युवा पीढ़ी  को सच जाने का हक है ! कॉंग्रेस के छपवाए जूठे स्कूली इतिहास पर मूजे आपत्ति है! तो जानिए हकीकत का विस्फोटक इतिहास जिसमे सत्यΦ विश्वास और पारदर्शिता के साथ प्रस्तुति की गई है !   
इसके तथ्य, सत्य होने पर शंका या कोई भी आपत्ति होने पर सम्पर्क करे eguru24x7@gmail.com आपको ब्रिटिश लाइब्रेरी के आर्काईवास की लिंक भेज दी जाएगी 

बीसवीं सदी में भारतीय इतिहास

वीर सावरकर ने बरसों पूर्व भारतीयों को उनके गौरवशाली इतिहास और परम्परा से परिचित करवाने के लिए भारतीय इतिहास के छः स्वर्णिम पृष्ठ नामक ग्रन्थ की रचाना की थी ताकि भारतीय अपने आप को पहचाने और किसी भी प्रकार की विदेशी सत्ता के समक्ष नत-मस्तक ना हो, राष्ट्रीय जीवन मूल्यों की आभा से उनका जीवन ही नहीं वरन मुख मण्डल भी प्रदीप्त रहे किंतु वर्तमान में विचारधारा के संघर्षकाल में या यू कहे कि संक्रमण काल में देश घटनाक्रम जिस तेजी से करवट ले रहा उससे आम नागरिक भौचक्का सा रह गया है, वैचारिक भ्रम इतना गहरा रहा है कि सच और झूठ में विभेद कर पाना काफी कठिन लगता है, ऐसे में देशवासियों को उनके स्वत्व, गौरव गरिमा और इतिहास के बारें में अवगत कराने की दृष्टि से लिखी गई है यह लेखमाला। इस लेख में 15 अगस्त 1947 से लेकर आज तक हमारे भाग्य विधाताओं ने जो महत्वपूर्ण भूले की है उनका वर्तमान में हमको क्या मूल्य चुकाना पड़ रहा है, के बारें में चर्चा की गई है।)

बीसवीं सदी में भारतीय इतिहास के छः काले पन्ने भाग .1

 इस वर्ष आपातकाल को कई साल बीत गए है। यह एक ऐसी घटना थी, एक ऐसा कानून था, जिसे लागू करने वाले लोग भूल जाना चाहते है और भुगतने वाले रह-रहकर याद रखना अपना धर्म समझते है। सवाल यह है कि हम भारत के लोग इतिहास से सबक लेकर कब अपना वर्तमान बुनेगें और भविष्य संवारेगें? हम भारतीयों के सम्बंध में यह सामान्य धारणा है कि हमारी सामाजिक स्मृति कमजोर है। हमारा कोई बुरा करे, हम पर आपराधिक कृत्य करें, आक्रमण करे या हमारे देश में बम विस्फोट करे, तो हम उसे भूलकर अपने आपको महान् और दयावान बताने का प्रयास करते है। भारतीय अपने पर आक्रमण करने वाले को भूल जाते है। उन्हे वे चेहरे याद नहीं रहते, जिन्होने उन्हे दास बनाया। हम भारतीय उन कारणों की कभी समीक्षा नहीं करते जो हमारी अवनति और पराजय के लिए जिम्मेदार होते रहे है। हमें न तो उपकार याद रहता है और न अपकार। 
इसलिए हम अपने लिए काम करने वाले, अपने लिए शहीद हो जाने वालों या हमारे लिए तिल-तिल कर जीवन गला देने वालों को भी भूल जाते है। चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह आज पाठ्यक्रम से बाहर है। गांधी के स्वदेशी और स्वाबलंबन कार्यक्रमों से देशवासी कोसो नहीं हजारों मील दूर चले गए है। देश की सुरक्षा में शहीद हुए नायको से नाता 15 अगस्त और 26 जनवरी को बजने वाले गानों की कैसेट में सिमटकर रह गया है। वस्तुत: भूल जाने की वृत्ति के कारण भारतीय समाज ने समय- समय पर बड़ी कीमत चुकाई है। ऐसी कीमत जो दुनिया के किसी देश और कौम ने नहीं चुकाई। हमें यह सीखना होगा कि कोई हमारे साथ गलत करे तब हम उसे सजा अवश्य दे। हमलावर पुनरावृत्ति न करे, इस बात के लिए हमने आवश्यक कदम न उठाए तो यह मूर्खता के अतिरिक्त कुछ नहीं। आपातकाल गत शताब्दी के प्रमुख काले पन्नों में से एक है। बीती शताब्दी में समय ने कई काले पन्ने लिखे है उनमें से प्रमुख छः काले पन्ने देशवासियों के विचारार्थ प्रस्तुत है-

 प्रथम काला पन्ना – सुभाष बाबू की राजनैतिक हत्याकिसी भी देश, व्यवस्था अथवा व्यक्ति के जीवन में जो बाते प्रथम बार होती है, उनका प्रभाव उस पर सदियों तक बना रहता है। जब भारत आजाद हुआ तो उसका पहला शासक कौन बना? उसकी नीतियां क्या थी? इसका प्रभाव उस देश, वहां की जनता व आगे आने वाली कई पीढिय़ों पर पड़ता है। किसी संस्था का स्थापना पुरूष कौन है? इस बात का असर जीवन भर उस संस्था पर बना रहता है। प्रारंभ का यह प्रभाव घट-बढ़ सकता है,किंतु समाप्त कभी नहीं होता। सदियों की गुलामी के बाद भारत स्वतंत्र होने पर उसका जो पन्ना लिखा गया, उसके नेपथ्य में जाना आवश्यक है।
एक नायक 48 साल की उम्र में संसार से चला गया! ऐसा कुछ लोग मानते है। 35 साल की उम्र में कोलकाता जैसे महानगर का मेयर बन गया। 41 साल की उम्र में वह युवा जब राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद को ग्रहण करता है तो कांग्रेस ही नहीं, पूरा देश उसकी ओर आशाभरी दृष्टि से देखने लगता है। जनता प्रेम से उसे  नेताजी जैसा सम्मानजनक उपनाम देती है। लोगों को सुभाषचन्द्र बोस के हाथों में स्वतंत्र और समर्थ भारत बनता हुआ दिखाई देने लगता है। लेकिन कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग उनके अध्यक्ष बनते ही उन्हे हटाने के ताने-बाने बुनने लगा। यही से भारतीय इतिहास का यह काला पन्ना लिखा जाना प्रारंभ होता है। कांग्रेस के तात्कालीन कर्ता-धर्ता जैसे-तैसे तो एक साल के लिए उन्हे अध्यक्ष के रूप में धका ले गए लेकिन दूसरे कार्यकाल के लिए जब सुभाष ने फिर अध्यक्ष पद का चुनाव लडऩे की घोषणा की तो कांग्रेस के कर्णधारों में खलबली मच गई। उस वर्ष कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन त्रिपुरी- जबलपुर में हुआ था। सुभाष बाबू बहुत बीमार थे। सहयोगी और सलाहकारों ने उन्हे सम्मेलन में न जाने को कहा, लेकिन वे जिद्द पर अड़े रहे। ठीक समय त्रिपुरी- सम्मेलन में पंहुच गए। कमजोरी और अस्वस्थता के कारण उन्हे स्ट्रेचर पर लिटाकर मंच पर लाया गया। सुसुप्त रूप में गांधीजी के मन में सुभाष बाबू के लिए पूर्व में ही अनमना भाव था। गांधीजी ने जब देखा कि सुभाष बाबू वापस अध्यक्ष बनने जा रहे है तो उन्होने पट्टाभिसीतारमैया को सुभाषचन्द्र बोस के सामने चुनाव में खड़ा कर दिया।

पट्टाभिसीतारमैया को  चुनाव में खड़ा कर दिया

विधिवत चुनाव हुआ जिसमें सुभाष बाबू 200 मतों से विजयी रहे और दूसरे कार्यकाल के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए। चुनाव में अपने उम्मीदवार की पराजय को गांधीजी ने इतनी बड़ी माना कि वे सार्वजनिक रूप से बोले, यह पट्टाभिसीतारमैया की हार नहीं बल्कि मेरी हार है। खुले पण्डाल में सभी राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने विधिवत रूप से चुनाव लड़कर चुने गए उम्मीदवार का अस्तित्व अब खतरे  में था। उनके साथ उनकी कार्यकारिणी के सदस्यों ने असहयोग करना प्रांरभ कर दिया। अपने अध्यक्षीय भाषण में सुभाष ने पांच बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। वे बिन्दु आज के संदर्भ में प्रासंगिक भी है व विचार करने योग्य भी। भाषण में रखे गए बिन्दु हमें यह ध्यान दिलाते है कि एक राष्ट्र नायक की दृष्टि व सोच की दिशा कैसी होनी चाहिए वे कहते है –

अध्यक्षीय भाषण में सुभाष

1. कांग्रेस के पास एक अति अनुशासित स्वयंसेवक दल होना चाहिए।
2. स्वतंत्र भारत में शासकीय अफसरों का एक कैडर गठित किया जाये। एडमिनिस्ट्रेशन का वह कैडर कांग्रेस के विचारों से पोषित हो।
3. श्रमिक व किसान संघों को मान्यता देकर कांग्रेस से जोड़ा जाये व उन्हे देश सेवा के कार्यो में लगाया जाये।
4. कांग्रेस में वामपंथियों को चकबंद कर उनसे समझौता किया जाये कि वे भविष्य में समाजवाद पर अडिग रहेगें।
5. भारत के अन्तर्राष्ट्रीय सम्बंध बढ़ाना व भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का निर्माण करना।

                                     कांग्रेस प्रतिनिधियों से खचाखच भरे पण्डाल के सामने दिए गए उस भाषण में लोगो ने स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री की झलक देखी। उन्होने देखा कि 42 साल का यह युवा ओज और तेज से भरपूर है, जिसकी विचार करने की शैली कांच की भांति साफ है। प्रतिनिधियों को उनमें बढ़ते भारत का भविष्य दिखाई दिया लेकिन दुर्भाग्य, उसी अधिवेशन में कांग्रेस कार्यसमिति ने एक प्रस्ताव पारित किया, उस प्रस्ताव में उन्होने जो लिखा वह निर्वाचित अध्यक्ष पर असंवैधानिक दबाब था। एक अध्यक्ष के नाते कार्य करने की स्वतंत्रता पर सीधा हस्तक्षेप था। कांग्रेस कार्यसमिति ने प्रस्ताव में लिखा कि –

  • कार्यसमिति में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को गांधीजी का निर्विवाद विश्वासपात्र होना आवश्यक है।गांधीजी के उम्मीदवार को हराकर अध्यक्ष बने सुभाष बाबू पर यह एक प्रकार से सीधा-सीधा हमला भी था और बंधन भी। जो कुछ भी यहां लिखा जा रहा है वह पट्टाभिसीतारमैया द्वारा लिखित कांग्रेस के इतिहास व कांग्रेस पर लिखित पुस्तकों व उसके सन्दर्भो में वर्णित तथ्यों व प्रमाण के साथ है।
  • Bibliographic information

 

  • कार्यसमिति सीधे-सीधे अध्यक्ष को कह रही थी कि जो भी कार्य करो, फिर चाहे कार्यकर्ताओं का मनोनयन करो अथवा नियुक्ति, वह सब गांधीजी की सहमति के बाद ही करो। उनकी इच्छा पहले जान लो और उसे ही निर्देश मानो। सम्मेलन व उसके बाद कार्य के गतिरोध हटाने पर लम्बी बहस होती रही, बातचीत के कई दौर चले। समकालीन कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बीच में पड़कर विवाद को बढ़ने से रोकना चाहा। लेकिन दूसरे धड़े को मानने वालों ने सुभाष बाबू को किसी भी प्रकार की स्वतंत्रता देने से मना कर दिया। संविधान और विधान के तहत चुने गए अध्यक्ष ने थककर कलकत्ता में 1939 में हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के खुले मंच से इस्तीफा हाथ में रख, भाषण देते हुए कहा-
1939 में हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी

  • मैं अपना ही निवेदन दोहराना चाहता हूं। वे अर्थात गांधीजी त्रिपुरी कांग्रेस द्वारा सौंपे गए दायित्व का वहन करे और कार्यकारिणी समिति मनोनीत करे। हमारा दुर्भाग्य रहा है कि हर प्रकार से विचार-विमर्श के बावजूद महात्मा गांधी कार्यकारिणी समिति नामजद नहीं कर सके। इसलिए सहयोग की भावना से मैं आपको अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं।राजनीति के इन काले पन्नों को लिखने की यह शुरूआत थी।                           

 [भाग 1 अंत ! आगे आयेगा भाग 2/6 पढ़ना ना भूले ….जुड़े रहे मेरी ब्लॉग को सबस्क्राइब करे Click On JOIN THIS SITE  Button Above with Google ID !! Share this On FACEBOOK ! Teach Youngster Real HISTORY out of their Fake Textbook History ] 


2 Comments

Filed under Congress, Congress Scams, Dharm, Hidden Truth with Proofs, HISTORY, History of India, Truth of Gandhi Family

हंस हंस के पागल कर देगी यह कमेंट्स—मोदी जी के समर्थक हो या विरोधी पढे जरूर ! नवभारत टाइम्स ने खुद कबूला की मोदी जी के विरोध मे लिखने को उसको कॉंग्रेस पैसे दे रही है !

हंस हंस के पागल कर देगी यह कमेंट्स आपको !! एक बार मोदी जी के समर्थक हो या विरोधी पढे जरूर !
हंसी तो आएगी ही लेकिन एक चौकानेवाली बात की, नवभारत टाइम्स ने खुद कबूला की मोदी जी के विरोध मे लिखने को उसको कॉंग्रेस पैसे दे रही है ! अगर एक अखबार का ये हाल आप सोच रहे हो तो भूल जाना ! पूरी मीडिया सिस्टम और न्यायतंत्र खरीद शके इतना पैसा आज एक मात्र नकली गांधी परीवार और उनके चमचो ने इकठ्ठा कर लिया है ! मानव भक्षी भेड़िये के मुंह अगर एकबार इंसानी खून का स्वाद लग जाये तो वो आसान शिकार पसंद नहीं करते और आदम खोर बन जाते है ! ये देश उबल रहा है ! मे हमेशा समाचार कम और प्रतिकृया और टिप्पणी – उसके सहमत – असहमत – और आपत्ति की संख्या भी ध्यान मे लेता हूँ ! लगता है दो चार अधूरे घड़े छोड कर पूरा देश आज मोदित्व्मेव जयते मानने लगा है ! इस देश को आज कोई उगारनेवाला मसीहा चाहिए ! और सबको वो मसीहा जादुई तरीके से सिर्फ और सिर्फ मोदी जी मे क्यूँ दिख रहा है ये सोचनेवाली बात है ! दोस्तो ! यह एक कलेक्शन नहीं है सीधा ही नवभारत टाइम्स की वेबसाइट से लिया गया है —-कुछ भी एडिट नहीं हुआ है !! सिर्फ कॉपी पेस्ट किया है और बीच की खाली जगह दूर करके व्यवस्थित किया है !
आप बस पढ़ते जाइए ….हँसते जाइए ….. इसमे मोदी जी के विरोध की टिप्पणी भी जस की तस रक्खी है !! लेकिन हर विरोधी की कमेन्ट पे आपा असहमत की संख्या गौर कराते जाना और जिनको उसके रीपलाय दिये गए है वह पढ़ते जाना !! लेकिन हंसने मे कहीं इस बात की गंभीरता मत भूलना की आज ….,
हर दिल मे जलन ….और जज़बातो मे तूफान सा क्यूँ है ……
इस देश मे हर शख्स ….. परेशान सा क्यूँ है ….!!!
या फिर …. हर एक जिस्म घायल हर एक रूह प्यासी …..निगाहों मे उलझन दिलो मे उदासी ….ये दुनिया है या आलम ए बाद हवासी [मूर्छित दुनिया]….ये दुनिया अगर मील भी जाये तो क्या है …? लेकिन ये सिर्फ आपकी दुनिया नहीं है ….. मेरी तो नहीं है ..और शायद ना होगी ..मोदी जी की भी नहीं है ना होगी …..उस आनेवाली पीढ़ियो के लिए आप इस देश को किस हाल मे छोड के जाएँगे ? क्या इन्हे इनहि विदेशियों और कोंग्रेसियों का गुलाम बनते अपनी माँ-बहन को देख शकों गे? तो ये धरती और ये हिंदुस्तान भी तो माँ-भारती है …! यकीन मानिए …! सिर्फ मूजे ही नहीं आज पूरे देश को मोदी जी मे एकमात्र तारणहार दिख रहा है ये तो आप पढ़ेंगे तो पता चल ही जाएगा ….!!
याद रखिए ….! हर एक मोदी समर्थक के जवाब की सहमति की संख्या और विरोधियो के कमेन्ट की असहमति की संख्या और उनकों दिये गए मुंह तोड़ जवाब देखना मत भूलना !!

यह थे समाचार जो न।भा।टा ने अपनी वेबसाइटे पे रक्खे थे
फिर झूठा साबित हुआ मोदी का दावा – modi’s claim on sonia once again prove wrong – Navbharat Times

 गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का एक और दावा झूठा साबित होता दिख रहा है। उन्होंने गुरुवार को दावा किया कि गुजरात के राजकोट में हुई रैली में सोनिया गांधी का भाषण इतना फीका था कि उसे स्थानीय अखबारों ने भी छापने लायक नहीं माना। मगर, तथ्य इस दावे को गलत बता रहे हैं।मगर तथ्य इस दावे की पुष्टि नहीं कर रहे। गुजरात के दो बड़े अखबार गुजरात समाचार और संदेश (देखें खबर के साथ लगी तस्वीर) ने इस रैली में दिए गए सोनिया के भाषण को खासा महत्व दिया। संदेश में रैली की तस्वीर को जरूर ज्यादा जगह दी गई है, लेकिन यह तस्वीर भी रैली के बारे में काफी कुछ कह देती है। तस्वीर के नीचे रैली की खबर है। रैली में कही गई मुख्य बातों को मोटे अक्षरों में छापा गया है। गुजरात समाचार में भी देखा जा सकता है कि रैली की खबर को विस्तार से छापा गया है। साफ है कि सोनिया के बारे में किया गया मोदी का यह वादा भी तथ्यों की कसौटी पर खरा नहीं उतर पा रहा।
========================▐ अब सिर्फ देश की आम जनता का रिएक्शन विरोध-सहमति दोनों पढ़ते जाये ! यकीनन ये मनोरंजन नहीं गंभीर विषय है लेकिन ……अगर आप हंस हंस के पागल ना हो जाये तो पैसे रिफ़ंड व्याज के साथ वापिस ================ Φ

S.J.Akhtar, Meerut का कहना है :
05/10/2012 at 11:18 AM
नेताओं के दावे व वादे विश्वसनीय नहीं होते हैं.–”रघुकुल की रीति का यह ज़माना तो है नहीं–वादा करो कि उसको नाभाना तो है नहीं.”–सविता असीम.
alpesh , mumbai का कहना है :
05/10/2012 at 11:12 AM
इसका मतलब ए है की हमे सिर्फ भसन् से पेट भर ना चाही है….. जिसे देस की अर्तनीतो बिचमे बदलना …….. ई से एक बत साबित होता है की खुद के खर्च को भी जनता पैसे उसेड कर ना 1800 करोड़े रुपी नही तो 1000 करोड़ रुपी तो खर्ज किया होगा………………..
आज की रॅली बत करेतो होने वाला खर्च कोन कर रहा है ………… जनता का पैसा या खुद का पैसे …………..????
A K GUPTA, BHOPAL का कहना है :
05/10/2012 at 11:02 AM
पहला गलत प्रचार तो यही है कि सोनिया ने भाषण दिया, दिया नही पढ़ा,भाषण देने मे दिल , दिमाग ,जुबान का उपयोग होता है पर पढ़ने मे केवल आंखे और जबान काम मे आती है
navbharattimes, new delhi का कहना है :
05/10/2012 at 10:44 AM
हाँ हम कॉंग्रेस से पैसा लेते है कोई भी व्यपार या दुकान बिना पैसो के नही चलती जब कॉंग्रेस घोटाले करके इतना पैसा बनाती है तो हमे थोङा बहुत देने मे क्या जाएगा
suman, gaziabad का कहना है :
05/10/2012 at 10:32 AM
मोदी की मजबूरी और छटपटाहट ही है सोनिया और राहुल का नाम लेना…. मोदी सोनिया और राहुल का नाम लेके अपना पाप डोना चाहते है और सुर्खियो मे रेहेने की लिये इश्के अलाबा कोई रास्ता भी तो नही है मोदी के पास…..
(suman को जवाब)
gaurav, jaipur का कहना है :
05/10/2012 at 12:59 PM
एक बर गुजरात जाके देखा फिर पता चलगा की उत्तर प्रदेश और गुजरात मे क्या अंतर हैइ
lax, delhi का कहना है :
05/10/2012 at 09:08 AM
अबे नवभारत टाइम्स वालो कितने तलवे चटोगे कॉंग्रेस के………….
तुम्हारे और कॉंग्रेस के पास लगता है न्यूज़ नही है……
तुम लोग अनजाने मे मोदी जी को हीरो बना रहे हो……. जो कि अच्छी बात है….
आज की डेट मे तो ऐसे हो रखा है कि सारी कॉंग्रेस एक तरफ और मोदी जी एक तरफ
kanu, Toront का कहना है :
05/10/2012 at 08:34 AM
Modi should talk about his state not about center or congress party. He don’t have any topic to speak so he speaks about congress or it’s pracident. When ever he speaks only about center he should be concetrating about his state or he wants to become Mamta who is name sake Mukhyamantri of one state but never in the state. or is he afraid of RAhul and Soniajee?
(kanu को जवाब)
prashant, delhi का कहना है :
05/10/2012 at 09:53 AM
वॉट आ जोक. सोनिया जी और राहुल से मोदी डरेगा. अबे कॉंग्रेस के चमचे तेरे जैसे गद्दारों ने पेहले भी देश बेचा है अब भी कर रहे है. एक बाहर की आई हुई औरत को भारत के बारे मे बोलने का फैसले लेने का हक है पर मोदी जो इस देश का नागरिक है उसे नही है? अबे सोनिया है कों एक पर्त्य की नेता है बस उसे इस देश या किसी स्टेट के बारे मे बोलने का कोई हक नही है. राहुल तो जब से चुनाव जीटा है तब से केवल एक बार आज तक लोकसभा गया है. मुफ्त की तनख्वाह उठा रहा है सरकार से. जब भी कोई इंपॉर्टेंट डिसिशन लेना होता है राहुल गायब हो जाता है. केवल मोदी ही देश को उपर लेजा सकता है. मोदी ही पीयेम बनेगा
vinay , new delhi का कहना है :
05/10/2012 at 04:21 AM
आज यह भी साबित हो ग्या की नवभारत टाइम्स एक इनडिपेंडेंट मीडिया न्यूज़ चॅनेल न्ही है| यह भी एक कांग्रेस जैसी ही चोर न्यूज़ चॅनेल है, जो हमेशा कांग्रेस सपोर्ट मे ही न्यूज़ लिखती है| *****चोर–चोर मोसेरे भाई******* शायद मुझे अब इस न्यूज़ चॅनेल की लिखी गयी न्यूज़ न्ही पढनी चाहिये|
Navbharat Times, New Delhi का कहना है :
05/10/2012 at 01:20 AM
अगर हम मोदी और बीजीपी के खिलाफ नही लिखेंगे तो हमको कांग्रेस से पैसे और सुविधाये नही मिलेंगी और नभाटा की दुकान बंद हो जायेगी. अगर हमारा लिखा सब सच होता तो गुजरात मे मोदी की सरकार कभी नही बनती . गुजरात के बाहर तो हम आपको बेवकूफ बना सकते हैं पर गुजरात की जनता तो सब जानती है .
(Navbharat Times को जवाब)
Suresh Nishad, Delhi का कहना है :
05/10/2012 at 07:29 AM
चलो मीडिया मे कुछ तो ईमानदारी बाकी है
(Navbharat Times को जवाब)
Javed Khan, UAE का कहना है :
05/10/2012 at 02:16 AM
वाह! अखबार हो तो ऐसा , झूट भी बोला पर सबके सामने झूट बोलने की मजबूरी को भी कबूल किया . काश सारे अखबार ऐसे होते .
(Navbharat Times को जवाब)
Pavan Mishra, London का कहना है :
05/10/2012 at 01:36 AM
सच को स्वीकार करने का ऐसा साहस सिर्फ नभाटा के पास है
rajesh, varanasi का कहना है :
05/10/2012 at 01:14 AM
नव भारत टाइम्स……….जियो ग़ुलामी ज़िंदाबाद??????????? शर्म नही आती?????????????तुम्हे देश के अखवार हो या देशद्रोहियो की ग़ुलामी कर ली है ????????
javed, india का कहना है :
04/10/2012 at 11:13 PM
जो झूट बोलता हे उसका कोई भरोसा नही वो कब झूट को सच ओर सच को झूट बनादे क्या मालूम मोदी का चुनाव चिन भी झूटा ही होना चाहिये तभी हम उसको वोट देंगे जय भारत

ABHAY, AHAMDABAAD का कहना है :
05/10/2012 at 01:03 AM
यार जावेद तुम्हारी मोदी से क़ियू जल रही है . वो आदमी तुमजैइसों को नोकरी भी ओर वियापार भी दे रहा है ओर एरिया का विकास भी करा रहा है, ओर क्या चाहिये सभी को ???????

(ABHAY को जवाब)
tejas, shah का कहना है :
05/10/2012 at 07:32 AM
अगर अखबार में सोनिया गाँधी की रैली की बात छपी है और मोदी का झूठ साबित हुआ तो उसे क्यों नही माना जाए…मोदी ने भी अपनी और अपने मंत्रियों ने यात्रा पर कितने खर्च किए है, इसकी जानकारी आरटीआय के तरह् नही दी है.. उस बारें में न मोदी कॅया बयान आया है न ही बीजेपी किया..
Dr.S.K Gha, AIMS Delhi का कहना है :
04/10/2012 at 10:47 PM
जनता के प्रतिक्रया से लगता है कि सही मे मोदी-जी परधानमंत्री के लायक नही है…… अगर हम ‘बंदर के हाथ मे हज्जाम का छुरा देंगे’ तो क्या होगा ????????…….यही ना कहेंगे की लहू-लुहान और यही सत्य भी है
chandra veer, delhi का कहना है :
04/10/2012 at 10:29 PM
मोदीका अहांकर ओर मोदी प्रेम देश को संप्रदयता जाट पात के गह्ररे कुए धकेले देगा…
mukesh Saini, KOTPUTLI,Jaipur,Rajasthan का कहना है :
04/10/2012 at 10:25 PM
आज नेता देस के हर आदमी को एक दुसरॅ सॅ लडवा रहॅ ईन कांग्रेस वालो को तो “फुट ड़ालो ओर राज करो” की नीती अपना रखी है
pankaj, delhi का कहना है :
04/10/2012 at 10:14 PM
1200 से ज्यादा पेपर छपते है गुजरात मे अब 2 को पैसा खिलाया होगा तो वो ही तो छापेंगे, बाकी तो उसे बढ़ा चढ़ा कर नही छापे. सोनिया का अपना कोनसा दावा सच्चा निकला है, आम जनता की जेब मे हाथ दल के माल निकलने का या उसका दूं निकलने का.
Indian, Noida का कहना है :
04/10/2012 at 10:04 PM
नवभारत टाइम्स वालो आप लोग इस पेपर का नाम बदलकर कॉंग्रेस टाइम्स रख लो…
Rahul Majumdar, delhi का कहना है :
04/10/2012 at 10:02 PM
चुनावो में आरोप प्रत्यारोप तो होते ही रहते है. आखिर सोनिया ने भी तो कहा की गुजरात का विकास कांग्रेस की देन है. पर बाकायदा किसी अखबार की कटिंग के साथ किसी दावे को झुटलाने के लिये इतनी मुस्तैदी अगर कोई राष्‍ट्रीय अखबार दिखाता है तो शंका होती है \ कोई कॉंग्रेसी प्रवक्ता अगर ये करता तो बात समझ आती, पर नवभारत टाइम्स को कॉंग्रेसी प्रवक्ता के रूप में देख कर हैरानी होती है. इतनी बचकाना हरकत है की किसी दूसरे अखबार की बाकायदा कटिंग तक अपने मुख्य पेज पर लगा डाली. ठीक भी है कांग्रेस पैसे बांट रही है नभाटा क्यों ना लूटे. ईमानदारी से तो पेट भरना ही मुश्किल है.
(Rahul Majumdar को जवाब)
snj, ranchi का कहना है :
04/10/2012 at 11:24 PM
ठीक कह रहे हो भाई इन अखबार वालों का स्तर इतना गिर गया है की मैं नवभारत लेना भी छोड़ दिया है.
sonu agarwal, Bhuj Gujarat का कहना है :
04/10/2012 at 09:53 PM
इसी लिये गुजरात की मीडिया खुकर इसपर बात नही करते
Sawitari dewi, Gujarat का कहना है :
04/10/2012 at 09:51 PM
मोदी-जी का असली चेहरा गुजरात मे देखने को मिलेगा…..यहा कश्मीर की तरह इमरजेंसी टाइप का लगा रहता है….लोग अपना सवतंत्रता खो दिया है…..छोटे जात को दंगा मे लिप्‍त करार देकर जेल भेजा जा रहा है ताकि मुसलीम खुश हो और वोट करे मोदी को
Sawitari dewi, Gujarat का कहना है :
04/10/2012 at 09:42 PM
हम तो अब यही कहेंगे की बाजपा भगाओ और अत्याचार मुक्‍त गुजरात बनाओ…
sitapari, Bihar का कहना है :
04/10/2012 at 09:34 PM
झूठ बोले कॉवा काटे काले कवे से डरियो…..गाना याद आरहा है
Sumit Ludihyana, Panjab का कहना है :
04/10/2012 at 09:27 PM
न्यूज़ से तो यही लगता है की मोदी-जी का बेड़ा गरक होने वाला है क्य?????
arpit , khandwa का कहना है :
04/10/2012 at 09:22 PM
नवभारत को कितने पैसे दिये है कॉंग्रेस ने , सोनिया का भाषन छापने के लिये मोदी इस ग्रेट कॉंग्रेस तो चोर है चोर ही रहेगी मग्र ए लोग चोरी अलग तरीके से करते है
Bharat Babu, Bhopal का कहना है :
04/10/2012 at 09:07 PM
नो कॉमेंट
indian-man, jaipur का कहना है :
04/10/2012 at 08:49 PM
मोदी बेचारा अगर सोनिया और राहुल का नाम नही ले तो मीडिया उसकी खबर नही दिखता. उसने गुजरात के विकास मे तो कुछ किया नही बस कांग्रेस की बुराई करके मीडिया मे बने रेहना चाहता है….उसे ए भी फ्रस्टेशन है की सोनिया ने अपनी रॅली मे मेरा नाम क्यू नही लिया..कामसे कम सुर्खिया तो बन जाती..अपने आप को केन्द्र कॅया नेता दिखाने की कोशिश कर रहा है..पर उसकी खुद की पार्टी उस को सपोर्ट नही कर रही….हर कॉमेंट सिर्फ सोनिया और राहुल पर क्यू कुछ अपने बारे मे भी तो बोलो…
Sunita Kumari, A to Z का कहना है :
04/10/2012 at 08:45 PM
झूठा आदमी ही तो असल नेता होता है नही तो साधु नही कहलाता…..संपादक जी आप भी किसी-किसी के पीछे इतना क्यू पर जाते है ….माफ कीजिये तबियत ठीक ना होने के करण भी होसकता है
(Sunita Kumari को जवाब)
ram, delhi का कहना है :
04/10/2012 at 09:46 PM
झूठ बोलने का ठेका आदमियों से ज्यादा कॉंग्रेस्स की तरफ़ से औरतों ने ले रखा है
xxx,yyy, A to Z का कहना है :
04/10/2012 at 08:38 PM
अच्छा 2014 मे फिर कांग्रेस ही राजभोग करेगा
Ranjan jhha, Waranasi का कहना है :
04/10/2012 at 08:22 PM
साधु संत का पैसा लिया है हजम नही होगा क्यू की शीपि-कवरी की तरह एक-एक कर जमा किया था संत लोग
Dandadhari, Sarvatra का कहना है :
04/10/2012 at 08:21 PM
इस समाचारपत्र का संपादक कांग्रेस के कार्यालय में बैठता है क्या
(Dandadhari को जवाब)
NBT, Editor, New Delhi का कहना है :
04/10/2012 at 09:16 PM
मुझे खेद है कि मैने आप लोगो की भावनाओ को थेश पहुचाया…… मैं मजबूर था …… मुझे यकीन है कि आप लोग मुझे माफ कर लेंगे……. धन्यबाद….
आपका प्रिय संपादक
(Navbharat times को जवाब)
rajesh, varanasi का कहना है :
05/10/2012 at 01:34 AM
नव भारत टाइम्स बोलो……. ग़ुलामी ज़िंदाबाद………. नव भारत टाइम्स एट्ना तौ कर सकता है ???????????????
Satish Pandit, Wijanor U.P का कहना है :
04/10/2012 at 08:12 PM
हे भाग्यवान पैसा ही सब से बड़ा मंदिर है इस देश के भ्रस्ट नेता केलिये….मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारा तो बलि का बकरा बन कर रह गया है
san shri, india का कहना है :
04/10/2012 at 07:59 PM
व्यक्ति को अपने पद के अनुकुल व्यवहार करना चाहिए । बोलने की गरीमा से ही आदमी महान बनता है । झूठ कभी लाभ नही पहुँचा सकता है । आलोचना तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए ।
gaurav raj rajpoot, ghaziabad का कहना है :
04/10/2012 at 07:57 PM
गली के कुत्ते को भी वोट दे दूंगा,पर इस कांग्रेस को नहीं दूंगा….जो लोग सहमत हों वे जरूर सहमत पर निशान लगाएं….जै हिन्द
Ravisankae parsad, Ajodhya का कहना है :
04/10/2012 at 07:55 PM
अन्ना हजारे को भाजपा के विरोध मे अनसन करना चाहिये क्योकि भाजपा मंदिर बनाने के बहाने पैसा लेकर पार्टी-फंड मे खर्च कर दिया और BJP अयोध्या मे चबूतरा तक नही बनवा सका है…मेरे समझ से इलेकसन से पहले पैसा ट्रस्ट को वापस होना चाहिये
Ghanshyam, Ahmedabad का कहना है :
04/10/2012 at 07:53 PM
गुजरात समाचार ओर संदेश ए दोनो अखबार गुजरात के पत्रकार जगत मे कलंक है दोनो जनता को छोड़ अपना उल्लू सीधा करने पर लगे रहेते है इन्होने गुजरात का सबसे ज्यादा नुकसान किया है. जनता इनसे परेशन थी तभी दिव्या भास्कर की सर्क्युलेशन गुजरात मे इनसे ज्यादा हुऐ है
Sahin, Panjab का कहना है :
04/10/2012 at 07:26 PM
मोदी-जी तो नेता है…. कोई साधु तो नही है जो झूठ ना बोलेगा…. चलो माफ कर दो
sssa, sasa का कहना है :
04/10/2012 at 07:10 PM
Paid news, NBT is heavily paid by congress.
(sssa को जवाब)
jas, usa का कहना है :
04/10/2012 at 07:54 PM
बिल्कुल सही कहा
arun, delhi का कहना है :
04/10/2012 at 07:00 PM
इस पेपर को बन कर देना चाहिये बी जे पी को. पूरे चमचे है कांग्रेस के
(arun को जवाब)
kapil kore, mumbai का कहना है :
04/10/2012 at 09:54 PM
तो पढता ही क्यूं हैं?
XXX,YYY, Gujarat का कहना है :
04/10/2012 at 06:59 PM
भाजपा हुये ‘लव सेक्स और धोखा’ का सिकार और मोदी है डाइरेक्टर और दर्सक हुये कांग्रेस
Ranakedar, Nigeria का कहना है :
04/10/2012 at 06:55 PM
हर कोई सोनिया कॉंग्रेस्स की माता की कृपा पाने में जुटा है,जितना मोदी को कोसोगे उतना ही ईनाम ज्यादा,,,हाहाहाहा,,,,,,,,, चाटो चाटो त्ल्वे उसके गोरे त्ल्वे चाटने की तो भारत के लोगों को पुरानी आदत है !
Khullam khulla, delhi का कहना है :
04/10/2012 at 06:52 PM
नभाटा खुलेआम सोनिया के चमचागिरी पर उतर आया है. पैसा आप महान हो.
himmat singh bhati, jodhpur का कहना है :
04/10/2012 at 06:50 PM
चुनाव की घोषणा के बाड मीडिया की तो लॉटरी निकल पड़ी जितना धन उतनी खबर,पैसा देदो कुछ भी लिखवालो
(himmat singh bhati को जवाब)
Bharat Babu, Bhopal का कहना है :
04/10/2012 at 08:53 PM
कांग्रेस के पास धन की कमी नही है !
Rakesh, Rajkot का कहना है :
04/10/2012 at 06:48 PM
मीडिया ओर कांग्रेस कुछ बी कर ले लेकिन जीतेगी मोदी इस्का फैसला हो चुका है सिर्फ परिणाम आना बाकी है .. मीडिया वालो को तो सिर्फ अपना धंदा चलना है.
indian, india का कहना है :
04/10/2012 at 06:48 PM
चुप बे कांग्रेस के चमचे ….उसकी चाटने की आदत लग है नवभारत टाइम को….
jp, ncr का कहना है :
04/10/2012 at 06:44 PM
मोदी का दवा मंच पर खड़े होकर कुत्तों की तरह भौंकना नहीं है, मोदी जी ने दस वर्ष के कुशल शासन में गुजरात का काया कल्प कर दिया है. आज गुजरात भारत का नंबर वन राज्य है. जो भौंका रहे है वे भी तो बताये कांग्रेस/ यूपीए ने देश की क्या दशा कर डाली है, राजस्थान में किस प्रकार धार्मिक दंगे हुये, असम में का हुआ. हरियाणा में एक महीने में 9 रेप के काण्ड हो चुके हैं. इन बेगैरतों को मंच पर चढकर झूठ बोलते हुये लाज भी नहीं आती है. कितने गिरे हुये हैं यह लोग. पब्लिक इनके झूठ का काहे बर्दाश्त कर रही है?
(jp को जवाब)
indian, india का कहना है :
04/10/2012 at 07:05 PM
बिल्कुल सही फरमाया आप ने, जरा देखिये की सोनिया कहती है की गुजरात में महिलाये सुरक्षित नही हैं लकिन सोनिया गाँधी एह नही बताती की डेल्ही में महिलाये कितनी सुरक्षित हैं या नही आगर सोनिया गाँधी के हिसाब से डेल्ही महिलाओ के लिये सुरक्षित है जहा हर रोज गंग रेप हो रहे हैं तो आप एशि बत से अंदाजा लगा सकते हैं की मेडम को कैसा गुजरात बना देना है
jp, ncr का कहना है :
04/10/2012 at 06:34 PM
इस देश में आदमी के भेष में कुछ कुत्तों को मुस्लिम वोट की लालसा में मोदी जैसे हठी पर भौंकने के सिवाय कोई काम नहीं रहा गया है. सब लगाकर दिन रात कुत्तों की तरह भौंक रहे हैं. अपने को सेक्युलर बतलाते हैं. देखिये भारत का सेकुलरिज़्म 60000 कश्मीरी पण्डित कश्मीर छोड़कर पलायन कर गये हैं, 808 कश्मीरी पण्डित कश्मीर में भय के वातावरण में जी रहे हैं. कश्मीर में 170 मंदिर ध्वस्त कर डाले हैं, कोई इन झूठे सेकुलरों से पूछे जब यह हुआ तब ए कहन जा मारे थे. इन सेकुलरों ने क्यों हिन्दू-मुस्लिम को मजहब के नाम पर लड़ा रखा है, क्यों नहीं उन्हें मिलजुलकर चैन से रहने देते है. लोगों को इन छदम सेकुलरों के कपड़े फाड़ डालने चाहिये. इस देश में पैदा हुये, पाले -बड़े हुये कांग्रेसियों को तो देश की चिंता है नहीं एक इंपोर्टेड लीडर इस देश का बेड़ा पार करेगा, ऐसी सोच वेल लोग मूर्ख हो गये हैं.
anju, delhi का कहना है :
04/10/2012 at 06:32 PM
जो पेपर के भ्षान को छप रहे ह्न वो या बिके ह या पैसा ले च्छुके ह्नया फिर उनपर त्‍लवार लटक रहिय है यह सच है की जितनी त्रकी गुजरात ने की है किस्सी सेटट ने नही की,कांग्रेस मोदीजी से डरती है
ram lal, dilli का कहना है :
04/10/2012 at 06:29 PM
गुजरातीयोको मोदी के जुल्म से नॅस्ट करना है बहुत दिनो तक गुजरातियोने मोदी का जुल्म सह लिया नरेन्द्रा मोदी ने गुजरातीयो को आपस मे लडवाया है और अपनी सीएम की खुरच्छी कायम करता था,
sabir, gujrat का कहना है :
04/10/2012 at 06:29 PM
कोई जरूरी नही है की सोनीया की रैली मे भिड़ जुटने से सारे लोग सोनिया के स्पोर्ट मे हो, भीड़ तो देखने आई थी की डायन देखने मे कैसी है,
(sabir को जवाब)
Bharat Babu, Bhopal का कहना है :
04/10/2012 at 08:57 PM
इसी डायन पर तो राजीव गाँधी फिदा हो गये थे !
AMM ADMI, SURAT का कहना है :
04/10/2012 at 06:26 PM
गुजरात की जनता मोदीजी को भारी बहुमत से जिटाकार सोनिया को मुहतोड़ जवाब देने की तयारी कर रही है इंतजार करे.
dev, knp का कहना है :
04 Oct, 2012 06:26 PM
फिर तो प्रसाद चढ़ा दो जाकर सोनिया माता पर.
bimal , delhi का कहना है :
04 Oct, 2012 06:24 PM
मीडिया एफड़ियाई डिसेंबर के बाद आयेगा | खास जरूरुई क्षेत्र एग्री बाकात है जल्द ही बहार आयेगा
सरकार को जाने की जल्दी है – – – इताली ?
RAVI RANJAN SINGH, KOLKATA का कहना है :
04 Oct, 2012 06:23 PM
nabharat times chor HAI,YAH DESH KO BACH DEGA,ISKO DESH SE BHAGA DO,HUM GALAT CHEZ DEKHA DAKHA KAR GUMHARAH KAR RAHA HAI
Prashant, Ahmedabad का कहना है :
04 Oct, 2012 06:20 PM
गुजरात समाचर और संदेश दोनो ही कांग्रेसी अखबार हैं. वे तो छापेंगे ही.. उनके पास वैसे भी पाठको का अभाव है .. वैसे नभाटा अपने कांग्रेसी भोंपू होने का फ़र्ज़ खूब निभाता है .
bharat, bharat का कहना है :
04 Oct, 2012 06:19 PM
आर्थिक सुधारो से आखिर किसका फाइया होगा / हमारे देश के संसद मे बैठे नेताओ का या आम जनता का / सरकार जो टॅक्स लगती है उससे योजना बनती है / सड़क बनती है / फिर भी सरकर टोल आ प्लाजा लगा डेटीटोल प्लाजा का कोई हिसाब किताब नही होता कोई बही खाता नही होता
Khan , Uttarakhand का कहना है :
04 Oct, 2012 06:16 PM
पेंशन पीएफ इन्सयूरांस मे FDI मंजूरी | किसान गये भाड़ मे | मोल रिटेल घोषणा 6 हफ्ते बाद | अब किसी को पेंशन नही मिलेगा | पेंशन कम्पनी सट्टे मे दिवाला निकाल देगी | तब रू 100 के पेंशन के सामने सरकार सिर्फ रु 14 ही देगी | हिटलर पार्टी का एटम बम गिरना शुरु | सोनिया को घुस मिल गयी है |
RISHI CHOPRA, KARNAL, HARYANA का कहना है :
04 Oct, 2012 06:15 PM
कितनी त्वरित टिप्पणी की है नवभारत टाइम्स ने, लगता है सोनिया को तो शायद इतनी जल्दी नही थी, मगर नवभारत टाइम्स तो कुछ ज्यादा ही जल्दी थी मोदी के बयान का जवाब देने की, और पुर जोर शोर से लगा गया अपना HOME WORK में / इससे आधा जोर और मेहनत भी अगर नवभारत टाइम्स इस देश की जनता के दुख दर्द तो उठाने में लगा दे तो आपका बहुत भला होगा. नवभारत टाइम्स तो कांग्रेस की प्रचार एजेन्सी की तरह भूमिका अदा कर रहा है / मेरी तो आपको यही राय है ” और भी गम है जमाने में मोहब्बत (मोदी) के सिवा” जै हिन्द……
Dev, HYD का कहना है :
04 Oct, 2012 06:13 PM
कुछ दिनो से कॉंग्रेस समर्थक काफी comments देने लगे है| लगता है कांग्रेस ने भी अपना प्रचार करना यहा भी शुरु कर दिया है, जो पहले यहा नही था |
Y.S.BAKSHI, HIMACHAL का कहना है :
04 Oct, 2012 06:12 PM
भीड़ से कुछ नही होता है, वोट सब कुछ करेगा, सही कहा पी एम साहेब ने , नोट पेडो पर नही उगते, तो वोट भी पेड़ों पे नही उगते, वोटर को तो कांग्रेस ने कही का नही छोड़ा ईतना सब कुछ होने के बाद भी अभी भी पब्लिक के सामने बोलने की सरम नही आती है———————————-?,
kamal, churu का कहना है :
04 Oct, 2012 06:11 PM
संपादक महोदय,
आप खबरों में भी मूल्य-निर्णय करने लगे हैं, यह एक प्रतिष्ठित अख़बार को शोभा नहीं देता| मोदीजी को लेकर आप कांग्रेस से भी अधिक व्यग्र दिखाई पड़ते हैं, कृपया अपनी मानसिकता बदलें, आखिर जनता भी तो कुछ समझती है?
ninadrajpathak, pune का कहना है :
04 Oct, 2012 06:10 PM
मीडिया को कॉंग्रेस के लोगो ने बहोत सारा पैसा दिया है लोकमत जैसे न्यूज़ पेपर्स यही कम करते है लगता है न,ब ट के भी दिन भर गये है इनका पेपर खरीदना बंद करो और फोकट मे भी मत पढ़ो सले कांग्रेस की पार्टी मे रत रत दारू पीकर खबर बनाते है चन्द पैसे के लिये बिकते है ए भी
madan, chennai का कहना है :
04 Oct, 2012 06:10 PM
नभाटा जब -जब बीजेपी के विरुध लिखती है. तब-तब में और भी बिजेपी की और झुक जाता हूँ. वैसे केजरीवाल की तरफ भी झुकाव है. परंतु कांग्रेस को तो नभाटा वालो ने ही झूठी तारीफ कर बर्बाद कर रही है.
sanjay rai, Mumbai, Maharashtra, India का कहना है :
04 Oct, 2012 06:07 PM
एक बार की बात है कुछ लोग एकट्ठे हुये
हाथोँ मेँ झंडा लेकर एक चट्टान से सिर
मारने पहुँचे ।उन्हेँ
पता नहीँ था कि ऐसा क्योँ करना है ।
लेकिन ये लोग बुद्धि से दिवालिया थे और
अपने धूर्त मालिको के आज्ञाकारी थे ।उस
देश के लोग मूर्ख थे ।उन मूर्खोँ को और मूर्ख
बनाने के लिये ही धूर्त लीडरोँ ने सिर
फुड़वाने का प्रवंध
किया था ताकि सुहानुभूति मिल सके ।खैर
कहानी आगे बड़े उससे पहले बतादू ।एकट्ठे हुये
लोग काँग्रेसी कहलाते थे और ये इटालियन
बैटरी से चलते थे ।……बहरहाल बड़ा जादू
हुआ ।जब काँग्रेसियोँ ने झंडे उठाये
तो अचानक सब झंड़े काँमनवैल्द के झंडे बन गये
।जब काँग्रेसियोँ ने नारे लगाये तो आसमान
से कोयले के ओले गिरने लगे ।…अंत मेँ जब
काँग्रेसियोँ ने अपने सिर चट्टान मेँ मारे
तो चट्टाने से बहुत जोर जोर से आबाजे आने
लगी ……..2जी ..2जी….2जी …… । यह सत्य
घटना 3/4 अक्टूवर 2012 को म.प्र. मेँ
घटी और करोँड़ोँ लोगोँ ने देखी ।
Shashi Kumar, Jalandhar, India का कहना है :
04 Oct, 2012 06:07 PM
राजनीति में चुनाव के वक़्त सब लोग अपनी साइड को बड़ा सिद्ध करने की कोशिश करते हैं. यह मनोवज्ञनिक प्रभाव डालने का ढंग होता है. पर ज़रा सोचिए तो सोनिया ने क्या नया कहा . यही की गुजरात सरकार 6 की जगह 9 सिलिंडर सब्सिडी पर क्यों नहीं देती. जब भाजपा सरकार केन्द्र में आयेगी तो कम से कम 12 सिलेण्डेर्स पर सब्सिडी मिलेगी. और इस में कोई गप्प भी नहीं है. जब पहले भाजपा सरकार थी तब के बारे में सोच कर देखो की गॅस की सप्लाइ का क्या हाल था.इस तरह सोनिया क्या इस तरह का विकास करेगी, जैसे की उसने केन्द्र में लोगों का किया है. पेट्रोल, डीज़ल महन्गा, गॅस कम और महन्गा, किसान दुखी , मज़दूर दुखी. हां केवल अमीर ही सुखी
Vinod Kataria, Gurgaon का कहना है :
04 Oct, 2012 06:04 PM
लगातार साबित होता जा रहा है की नवभारत टाइम्स पूरी तरह से सोनिया गाँधी की चमचागिरी मे जुट गया है. पीछ्ली बार भी कांग्रेस या दूसरी पार्टीयो के बाद मोदी से लड़ने की ताकत नही थी और विरोधी का रोल मीडिया ने ही निभाया था और मूह की खाई थी इस बार भी सोनिया, कांग्रेस, या किसी अन्य मे मोदी से लड़ने का दम नही है तो मीडिया लंगोटी टांग कर मैदान मे आ गया है और एक बार फिर मोदी फिर उसे चारो खानो चित कर देगा.
Sahib Jalal , Fatehgarh Noorpur 147203 [UP] का कहना है :
04 Oct, 2012 06:04 PM
इटालियन लेड़ी लादी और वर को चहरे और पूरे जिस्म पर कालिमा लगाई है अब मोदी पर सवाल अप्रासंगिक है | जो हुवा वो जरूरी था | चुनाव जल्द घोषित करे |
Ashok Dubey, Green Park का कहना है :
04 Oct, 2012 06:02 PM
कमाल है हमारे कुछ पाठकगण सिर्फ ओर सिर्फ मोदी ओर भाजपा की तारीफ सुनना चाहते है….लेकिन अकल के अन्धे ए नही देखते की सच्चाई क्या है…..एक बात तो झूठ जरूर है की या तो मोदी झूठा है या फिर ए तस्वीर ओर अकबार झूठ छाप रहे है….फैसला देश की जनता को करना होगा…लेकिन मे यही कहना चाहूंगा की जनता उस गंधारी की तरह ना बने जो आंख होते हुए भी अंधी ही बन के रहती थी…..उसकी मंशा तो कुछ ओर ही थी…उसे त्याग कहा जाता है…मोदी अभिमानी हो ग्या है…अब वो मोदी नही बोलता जो गुजरात के शेर था…अब तो वो मोदी बोलता है जो अपने आपको सही ओर दूसरों को गलत साबित करना चाहता है…बस मे ही ठीक हूँ…ओर कोई नही….मेरा हमेशा मोदी के विष्य मे लिकते हुए एक सवाल किया है…जब मोदी ने इतना काम किया है..विकाश पुरुष का तमगा मिला हुआ है फिर ए डर क्यों…फिर ए ओच्छि राजनीति क्यों???लोगों को बोलने दो…आपका तो काम बोलेगा….फिर क्यों बिना बात पे सोनिया ओर सिर्फ कांग्रेस को निशान बनाया जाता है मोदी के दवारा????
(Ashok Dubey को जवाब)
kanu, toronto का कहना है :
05 Oct, 2012 08:44 AM
Modi does not have any thing to count. He is making his bread and butter only saying bad thing about congress. He never said any thing about his state or development in his state.Have you heard him saying any thing about his state?
(Ashok Dubey को जवाब)
arjun, ganj basauda का कहना है :
04 Oct, 2012 07:24 PM
तुम केशु भाई की की नाजायज सन्तान हो…..
(Ashok Dubey को जवाब)
RAHUL AGARWAL, MUMBAI का कहना है :
04 Oct, 2012 06:17 PM
ANDHE TO BHAI SAHAB AAP LAG RAHE HAI JINHE IS VIDESHI NARI SE ITNI SAHANUBHUTI HO RAHI HAI, KAMAL HAI JIS LADY NE GHOTALE KAR KAR KE PURE DESH KO LUT LIA HAI, HUM SAB USKA SAMMAN KARE????? SHAYAD ISI MANSIKATA KE KARAN YE DESH GULAM HUA THA

(Ashok Dubey को जवाब)
sanjay rai, Mumbai, Maharashtra, India का कहना है :
04 Oct, 2012 06:15 PM
सरकारी तंत्र में दो किस्म के अधिकारी हैं – एक जो भ्रष्टाचार में भागी दार हैं और दुसरे जो भारतीय संस्कृति के अनुसार इमानदार और कर्तव्यनिष्ठ हैं. अभी तक भ्रष्ट लोगों का बोलबाला था और वो ईमानदार अधिकारीयों को बहुत त्रस्त करते थे. अब ईमानदार अधिकारी इस व्यापक भ्रष्टाचार का भंडा फोड़ करने में समर्थ हो गए हैं. CAG एक के बाद एक काण्ड का भंडा फोड़ कर रहे है. समाज में से भी श्री अन्ना हजारे और उनकी टीम, और श्री बाबा रामदेव जी ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़ा आन्दोलन छेड़ दिया है. इन इमानदार लोगों को भ्रष्ट पोलिटिकल parties के कार्य कर्ता गालियाँ निकाल रहे हैं उन्हें ये पता नहीं कि देश में से यदि भ्रष्टाचार ख़तम हो जायेगा तो उन्हें स्वयं और उनकी संतान और आने वाली पीढ़ियों को कितना लाभ होगा. मित्रो, आप समझ लें जो भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध काम करने वालों को गालियाँ निकालता है वह भ्रष्ट लोगों का सहभागी है.

भ्रष्ट सरकार को BJP ही भारी पड़ रही थी अब एक नया समूह उनके साथ जुड़ गया है – ये हैं इमानदार सरकारी अफसर जो अभी तक बोल नहीं पा रहे थे इन्हें अब एक रास्ता मिल गया है. कल एक टीवी चैनेल पर जब गोरमेंट की अंदरूनी रिपोर्ट दिखाई गयी जिस से सब अन्दर के घोटाले खुल कर सामने आ गए तो मै तुरंत समझ गया कि अब सरकार को भारी पड़ने वाला है क्योंक कि अब उनके घर के भेदी ही, जिनको इन्होने अब तक दबा कर रखा था, इनकी पोल खोलने वाले हैं. कहते हैं ‘घर का भेदी लंका ढाए’ . तो मै समझता हूँ कि दिन प्रति दिन सरकार की छवि और और ख़राब होने वाली है ऐसे में उन्हें क्या करना चाहिए आप सलाह दें.

सहमत(15)असहमत(0)बढ़िया(8)आपत्तिज===============================समाप्त=========================================

ƪJugal Eguru

►100% से ज्यादा सत्य यही है की आज भारत के पीछड़ेपन-गरीबी-बेकारी – भूखमारी सबके लिए हर एक भारतीय खुद जिम्मेदार है …►क्यूँ की इनको आजादी मुफ्त मे और भीख मे मीली थी इस लिए कोई देश भावना या कदर नहीं इसकी ! इजरायल को देखो हर सेकंड उसके अस्तित्व और आजादी पे खतरा बना रहता है ! उस तरह से वो गुजरात जितना छोटा देश चारो तरफ मुस्लिम राष्ट्रो से घीरा हुआ है ! वहाँ हर 18 साल के युवक युवती को 2 साल की सैन्य तालिम के लिए जाना ही पड़ता है ! हर नागरिक एक सैनिक है ! ईंट का जवाब पहाड़ से देते है !! उनको कदर है अपने देश अपनी आजादी की , और इसी लिए तो अमरीका जितनी बड़ी महा सत्ता को भी मजबूरन उसके सामने झुकना पड़ता है !
जबतक इजरायली नागरिक का 10% भी हमारे देश की हर नागरिक की मानसिकता नहीं होगी इस देश मे कुछ नहीं हो शकता !
आज गुजरात मे देखिये, हर नागरिक आज से दस साल पहले सरकार और सरकारी कामके बारे मे – योजनाओ के बारे मे अपने हक के बारे मे कुछ भी नहीं जानता था ! और आज ~ मोदी जी की सब को साथ ले-कर चलाने की मिनिमम-गवर्नमेंट मेक्सिमम गवर्नन्स बाय पबलीक — पॉलिसी की वजह से हर कोई करीब 80% लोग जागरूक हुए है ! आज वे अपने राज्य और देश की हर मुश्किल से दुखी और व्यथित है ! देश-प्रेम से भरे मौत से भी पीछे ना पड़नेवाले कई मेरे जैसे युवा है —सिर्फ फेसबुक पर नहीं – जमीनी सतह पर भी वह लोग राज्य और देश सेवा – जन जागृति मे जुटे हुए है ! इसी को कहते है इजरायल का 5% — अभी 10% तक पहुंचना बाकी है ! जो मोदी जी के विरोधी और कॉंग्रेस के खात्मे के साथ हो जाएगा !
जयहिंद – जय गुजरात ! █▌║││█║▌│║█║▌© Official Jugal Eguru™

►►मौसम बदल रहा है, अँधेरा गुम हो जाने को है! हिलने लगी है तख्त-ए-ताज, लगता है तूफाँ गुजरात की तटों से आने को है!! जय हिंद ►►
║││█ ADD FRIEND – GET BEST: VISIT TIMELINE -..

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यूपीए के आर्थिक सुधार 2007 से ही खुद के लिए लागू कर दिये थे क्या ?रॉबर्ट वाड्रा ने चार साल में बनाए 300 करोड़ !!

  • रॉबर्ट वाड्रा ने चार साल में बनाए 300 करोड़

  • रॉबर्ट वाड्रा ने चार साल में बनाए 300 करोड़
  • नई दिल्‍ली. राजनीति में कूदने का ऐलान कर चुके अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों ने गांधी परिवार पर जमकर हमला बोला है। केजरीवाल ने इस बार कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पेशे से बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा प्रियंका गांधी के पति हैं। 
  •  
  • केजरीवाल और उनके साथियों ने शुक्रवार को यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि रॉबर्ट ने चार सालों में करीब 300 करोड़ की संपत्ति बनाई है। उनका कहना है कि 2007 से 2010 के बीच वाड्रा की संपत्ति 50 लाख से 300 करोड़ हो गई। टीम केजरीवाल ने पांच आरोप और इतने ही सवाल उठाए।
  •  पांच आरोप : 1. डीएलएफ ने वाड्रा को बिना ब्‍याज के 65 करोड़ रुपये दिए। 2. वाड्रा को हिल्‍टन गार्डन इन, दिल्‍ली में 150 करोड़ का हिस्‍सा 32 करोड़ में दिया गया। 3. डीएलएफ मैग्‍नोलिया में सात फ्लैट दिए गए। पांच करोड़ 20 लाख में दिए गए जबकि बाजार भाव 35 से 70 करोड़ रुपये है। 4. डीएलएफ अरालियाज में 25 करोड़ का फ्लैट 79 लाख में दिया गया। 5. डीएलएफ अरालियाज में 10 हजार वर्ग फुट का पेंट हाउस लिया।
  • पांच सवाल : 1. डीएलएफ ने वाड्रा को बिना कर्ज के ब्‍याज क्‍यों दिया? 2. डीएलएफ ने इतनी सारी संपत्ति वाड्रा को कौडियों के दाम पर क्‍यों दी? 3. क्‍या डीएलएफ वाड्रा पर इसलिए मेहरबानी कर रहा है कि उसे कांग्रेस की सत्‍ता वाली दिल्‍ली और हरियाणा सरकार के जरिये फायदा पहुंचाया गया?  4. क्‍या प्रॉपर्टी से जुड़ी इन सभी डील्‍स में कांग्रेस का काला धन लगाया गया है? 5. इन डील्‍स की तहकीकात कौन करेगा? 

 

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वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता के शिल्पी

इतिहास कैसे रचा जाता है इसका इतिहास जानने के लिए भारत में वल्लभ भाई पटेल का प्रयास प्रत्यक्ष प्रमाण है। संकल्प, साहस, सूझ-बूझ के धनी पटेल ने तत्कालीन 565 से भी अधिक देशी रियासतों का भारत मे विलीनीकरण करके राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार के रूप में इतिहास रच दिया है। भारत को सुदृढ़ बनाना उनका सपना था।

जिसे प्रज्ञा और पुरूषार्थ से उन्होंने साकार कर दिया। राष्ट्रीय एकता के शिल्पी के रूप में समय स्वयं उनके कृतित्व के चंवर डुलाता है और इतिहास उनके व्यक्तित्व को पलकों पर बैठाता है। उनकी प्रकृति में पुरूषार्थ, संस्कार में स्वाभिमान, सोच में सार्थकता और संवाद मे स्पष्टवादिता थी। मंदिर पर कलश की तरह उनका कृतित्व और बर्फ की चट्टान में आग की तलवार की तरह व्यक्तित्व था। सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात में हुआ था। उनके पिता झबेर भाई बोरसद ताल्लुका के करमसद गांव के निवासी थे। वे पेशे से साधारण किसान थे। उनकी माता लाड़बाई तथा पिता ने साहस, सच्चाई और सादगी के संस्कार तो सिखाए ही पुरूषार्थ और पराक्रम का पाठ भी पढ़ाया। प्रारंभ में प्रांतीय किसान नेता के रूप में तथा आगे चल कर देश के दिग्गज और दिलेर नेता के रूप में वे अपने फौलादी व्यक्तित्व के कारण लौह पुरूष कहलाए।

15 दिसंबर 1950 को उनका स्वर्गवास हो गया। सरदार पटेल असत्य के आलोचक और सत्य के समर्थक थे। कितना ही शक्तिशाली व्यक्तित्व क्यों न हो अगर वह अहंकारी व अन्यायी होता तो उसे मुंह पर फटकारने का पटेल में गजब का नैतिक साहस था, लेकिन स्वयं से गलती होने पर स्वीकारने की अद्भुत गुण भी उनमें था। उदाहरण के लिए गुजरात क्लब के आमंत्रण पर जब महात्मा गांधी व्याख्यान देने आए तो पटेल ने गांधी जी की उपेक्षा करते हुए कहा मैं इस प्रकार सत्‍यागृहीयों को समर्थन नहीं करता हूं

ये लोग अंजीनिर्वासी करके परम शक्तिशाली ब्रिटिश शासन को यहां से उखाड़ फेंकेगे मुझे इसमें बहुत संदेह है।” लेकिन कालांतर में चंपारण जिले में गांधी जी द्वारा जा रहे सत्‍यागृह को देखकर चमत्कृत और अभिभूत हो गए थे। तब से वे गांधी जी कीआंदोलन पद्धति के प्रशंसक और भक्त बन गए थे। यही कारण था कि उन्होंने सत्याग्रह के महात्मा गांधी के दर्शन को क्रांतिकारी निरूपित किया। उन्होंने खुद सत्याग्रह के कई प्रयोग करके अन्याय व आतंक को ध्वस्त किया। गांधी जी के साथ उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। जिससे उनकी संघर्ष शक्ति और बढ़ गई। नागपुर का झंडा सत्याग्रह, बारडोली का ताल्लुका सत्याग्रह, उनकी ख्याति मे चार चांद लगा गया।
वे टे्रड यूनियन संबंधी सुधारों और आंदोलनों के भी प्रेरणा पुंज थे। जब भारत आजाद हुआ तो जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्रित्व मे उन्हें गृह विभाग के साथ-साथ देशी रियासतों का विभाग भी दिया गया। पटेल ने विवेक और- पुरूषार्थो का प्रयोग करके देशी रियासतों का भारत में विलीनीकरण करके भारत को एकता के सूत्र में पिरोया। यह उनकी दूरदृष्टि और व्यूह रचना का परिणाम था कि जूनागढ़ और हैदराबाद रियासतों का विलय उन्होंने भारत में कराया। हैदराबाद विलय टेढ़ी खीर था, लेकिन पटेल ने अपने अदम्य साहस से वह कर दिखाया।
शेख अब्दुला के प्रभाव में आकर नेहरू जी ने कश्मीर मामले को पटेल के रियासत विभाग से अलग कर दिया। बतौर प्रधानमंत्री नेहरू जी ने कश्मीर को विशेष्ा राज्य के रूप में अपने हाथ में ले लिया था। बाद में कश्मीर के मामले को नेहरू जी संयुक्त राष्ट्र में लेकर गए तब से ही कश्मीर की समस्या सुरसा की तरह बढ़ती जा रही है। पटेल की एक शक्तिशाली सैनिक कार्रवाई कश्मीर समस्या को सदा के लिए सरलता से सुलझा सकती थी। पटेल ने बड़े दुख से कहा था कि “जवाहरलाल और गोपालस्वामी अयंगर ने कश्मीर को व्यक्तिगत विष्ाय बनाकर मेरे गृह विभाग तथा रियासत विभाग से अलग न किया होता तो कश्मीर समस्या उसी प्रकार हल होती जैसे हैदराबाद की।”

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नेहरू का आशिक़ मिज़ाज भारी पड़ा ।

यदि सरदार वल्लभभाई पटेल देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने होते तो भारत कश्मीर,आतंकवाद, और साम्प्रदायिकता जैसे मुद्दों/ समस्याएं खड़ी ही नहीं होती ।देश का दुर्भाग्य उसी दिन शुरू हो गया था जिस दिन आशिक़ मिज़ाज नेहरू भारत के प्रधानमंत्री बने थे।

राष्ट्रभक्ति की भावनाओं से उनका ह्रदय सराबोर था.दृढ निश्चय और राष्ट्र हित में कुछ भी करने के लिए कृतसंकल्प सरदार पटेल के जीवन का एक प्रेरक प्रसंग उनके चरित्र का एक पक्ष प्रस्तुत करता है।

सरदार पटेल का सर्व महत्वपूर्ण योगदान था देशी राज्यों का भारतीय संघ में विलय . गृह मंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता देसी रियासतों(राज्यों) को भारत में मिलाना था। ये दुष्कर कार्य उन्होंने बिना रक्तपात व हिंसा के अपनी बुद्धिमता और कूटनीति के बल पर सम्पादित कर दिखाया।

देश को अखंडता का तोहफा देने वाले सरदार पटेल के साहस ने संभवतः देश के खंड खंड होने से बचाया और उ नके निर्णय देश हित में थे ।राष्ट्र-निर्माता ‘लौह पुरुष’ के नाम से विख्यात सरदार पटेल को भारत के एकीकरण में उनके महान योगदान के लिये उन्हे भारत का लौह पुरूष के रूप में जाना जाता है।

देश के इतिहास में एक ऐसा मौका भी आया था, जब महात्मा गांधी को स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पद के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल और जवाहरलाल नेहरू में से किसी एक का चयन करना था। लौह पुरुष के सख्त तेवर के सामने नेहरू का आशिक़ मिज़ाज विनम्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण भारी पड़ा ।

भारतीय सिविल सेवा के एम ओ मथाई जिन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी सचिव के रूप में भी कार्य किया. मथाई जी ने एक पुस्तक “Reminiscences of the Nehru Age”(ISBN-13: 9780706906219) ‘लिखी ! किताब से पता चलता है कि वहाँ जवाहर लाल नेहरू और माउंटबेटन एडविना (भारत, लुईस माउंटबेटन को अंतिम वायसराय की पत्नी) के बीच गहन प्रेम प्रसंग था । भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और अन्तिम वायसराय लार्ड माउन्टबेटेन की पत्नी एडविना के बीच रोमांस की चर्चा सर्वव्यापी है। एडविना की बेटी पामेला हिल्स ने भी इसे स्वीकार किया।
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भारत की बहुत सी समस्याओं के लिये आशिक़ मिज़ाज जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार माना जाता है। इन समस्याओं में से कुछ हैं:

• लेडी माउंटबेटन के साथ नजदीकी सम्बन्ध
• भारत का विभाजन
• कश्मीर की समस्या
• चीन द्वारा भारत पर हमला
• मुस्लिम तुष्टीकरण
• भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिये चीन का समर्थन
• भारतीय राजनीति में वंशवाद को बढावा देना
• हिन्दी को भारत की राजभाषा बनने में देरी करना व अन्त में अनन्त काल के लिये स्थगन
• भारतीय राजनीति में कुलीनतंत्र को बनाये रखना
• भारतीय इतिहास लेखन में गैर-कांग्रेसी तत्वों की अवहेलना

सन १९६५ के बाद भी भारत पर अंग्रेजी लादे रखने का विधेयक संसद में लाना और उसे पारित कराना : 3 जुलाई, 1962 को बिशनचंद्र सेठ द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू को लिखे गये पत्र का एक हिस्सा निम्नवत है-

राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रति सरकार की गलत नीति के कारण देशवासियों में रोष व्याप्त होना स्वाभाविक है। विदेशी साम्राज्यवाद की प्रतीक अंग्रेजी को लादे रखने के लिए नया विधेयक संसद में न लाइये अन्यथा देश की एकता के लिए खतरा पैदा हो जाएगा।…यदि आपने अंग्रेजी को 1965 के बाद भी चालू रखने के लिए नवीन विधान लाने का प्रयास किया तो उसका परिणाम अच्छा नहीं होगा।

डा. राममनोहर लोहिया ने संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के ऐशो आराम पर रोजाना होने वाले 25 हजार रुपये के खर्च को प्रमुखता से उठाया था। उनका कहना था कि भारत की जनता जहां साढ़े तीन आना पर जीवन यापन कर रही है उसी देश का प्रधानमंत्री इतना भारी भरकम खर्च कैसे कर सकता है।

एक बार सरदार पटेल ने स्वयं एच.वी. कामत को बताया था कि ”यदि जवाहरलाल नेहरू और गोपालस्वामी आयंगर कश्मीरी मुद्दे को निजी हिफाजत में न रखते तथा इसे गृह मंत्रालय से अलग न करते तो मैं हैदराबाद की तरह इस मुद्दे को भी देश-हित में सुलझा देता।”

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के चुनाव के पच्चीस वर्ष बाद चक्रवर्ती राज गोपालाचारी ने लिखा-”निस्संदेह बेहतर होता, यदि नेहरू को विदेश मंत्री तथा सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनाया जाता।

सच में देश को लौहपुरुष की बहुत जरूरत है ,..काश सरदार पटेल प्रधानमन्त्री होते तो देश का हाल कुछ और ही होता ,…..आशिक़ मिज़ाज नेहरू की चाटुकारी नीति आज तक देश को खा रही है ,..कब तक खाती रहेगी ?…पता नहीं

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